मेरे नयन, नख से तीखे


ऐसा भी नहीं की मैं सजती रहूं दिन भर
ए आइना अपनी औकात में रह.
ऐसा भी नहीं की मैं सजना छोड़ दूँ
ए आइना अपनी औकात में आ.

अभी तो अंग खिलें हैं मेरे
अभी तो पंख खुलें हैं मेरे
ऐसा भी नहीं की उड़ना छोड़ दूँ
ए हवा अपनी औकात में आ.

ये घोंसले उन खगों के हैं
जिनमे अब उन्माद नहीं।
मेरे नयन, नख से तीखे
तो ए निशा अपनी औकात में आ.

 

परमीत सिंह धुरंधर

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s