मराठी-मुलगी और बिहारी लट्टू


कुटे-कुटे चली रानी
कुटे-कुटे तू
सांग ज़रा नैनों से
कब करेगी गुटर-गू.

बरसने लगे हैं बादल
उठने लगी है मिटटी से खुसबू।
गूंजने लगे हैं भोंरे
और चमकने लगे हैं जुगनू।
सांग ज़रा नैनों से
कब करेगी गुटर-गू.

तू बसंत सी खिली – खिली
मैं निशाचर उल्लू।
तू मराठी-मुलगी
और मैं बिहारी लट्टू।
सांग ज़रा नैनों से
कब करेगी गुटर-गू.

परमीत सिंह धुरंधर

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