बनाये मुझे मवाली रे


ए गोरी तेरे अंग – अंग पे, खुदा ने कुदरत बरसाई रे
काली – काली आँखे तेरी, बनाये मुझे मवाली रे.

जी करता है चुम लूँ तुझको, बनके भौंरा हरजाई रे
कसी – कसी चोली तेरी, बनाये मुझे मवाली रे.

कटती नहीं राते अब, जब से देखि तेरी नाभि की गहराई रे
लहराती – बलखाती कमर तेरी, बनाये मुझे मवाली रे.

नींदें नहीं आती अब तो अकेले अपनी चारपाई पे
गदराई जवानी तेरी, बनाये मुझे मवाली रे.

परमीत सिंह धुरंधर

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