प्रेम जितना मधुर होगा
प्रेम उतना ही सहज होगा.

प्रेम जितना सहज होगा
प्रेम उतना ही निकट होगा।

प्रेम जितना ही निकट होगा
ह्रदय उतना ही जवाँ होगा।

हृदय जितना ही जवाँ होगा
रूप उतना ही पुलकित होगा।

रूप जितना ही पुलकित होगा
सहचर्य उतना ही मधुर होगा।

परमीत सिंह धुरंधर 

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