जिंदगी


गमे-दर्द में तुम बहकने लगे हो
सफर जिंदगी का, तुम थकने लगे हो.
गमे-दर्द में तुम बहकने लगे हो
ये सफर जिंदगी का, तुम थकने लगे हो.

सूरज वही है, चंदा वही-२
एक तारे के टूटने से डरने लगे हो.
पर्वत तुम्हारे हैं, पहाड़े तुम्हारी-२
एक दरिया के बहाव पे तुम थमने लगे हो.
गमे-दर्द में तुम बहकने लगे हो
ये सफर जिंदगी का, तुम थकने लगे हो.

काँटों से भरी है यहाँ राहें सभी की-२
तुम खुद ही हाँ दामान चुराने लगे हो.
क्या पाना यहाँ और खोना यहाँ-२?
ये कैसे सवालों में खुद को उलझाने लगे हो?
गमे-दर्द में तुम बहकने लगे हो
ये सफर जिंदगी का, तुम थकने लगे हो.

Rifle Singh Dhurandhar

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