बनारस


तेरा मुस्कराना, अब वो मुस्कराना न रहा
तेरा दीवाना, अब वो दीवाना न रहा.
तूने रचाई मेहँदी ऐसे किसी के नाम की
बनारस बसने का मेरा इरादा, इरादा न रहा.
हसरतों को ऐसे दफना गयी वो मेरे
फाइलों को चूमने का कोई बहाना न रहा.
उन्हें ही देख के सजाता था वीरान ठिकाने को
उन्हें देखने का वो अब अपना ठिकाना न रहा.

RSD

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s