तो मेरा चाँद निकले


वो जो अपनी जुल्फों में हैं रात को समेटे
गेसुओं को खोल दें तो मेरा चाँद निकले।
वो जो हया में अपने बंध के मंद-मंद मुस्करा रहे हैं
ये पर्दा हटा दें तो मेरा चाँद निकले।
हजारों आड़ावों से भरी है उनकी खिली जवानी
जरा जाम छलका दें तो मेरा चाँद निकले।

RSD

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