मैं कोमल – कुमुदुनी हूँ

ना खेलो मेरे ह्रदय से मैं कोमल – कुमुदुनी हूँ. अपना बना लो मुझे आतुर मैं प्रचंड अग्नि हूँ. व्यर्थ न करो मेरे तन – मन को मैं तुम्हारी जीवन – संगिनी हूँ. क्या प्राप्त कर लो गे, गंगा-पुत्र? इस प्रतिज्ञा को पाल कर. भीष्म तो बन जाओगे पर मैं तुम्हारी अधूरी – जिंदगी हूँ. … Continue reading मैं कोमल – कुमुदुनी हूँ