चरित्र


बदलता मौसम भी शर्मसार है, वो इस कदर रंग बदलती है,
चाँद भी कहीं जाके छुप जाता है , वो इस कदर साथ बदलती है.
पोंगे पंडित थे वो जो लिख गये, की मनेका ने विश्वामित्र का तप तोडा,
बिलखते-बिकलते शिशु को जिसने , सवर्णों की चाहत में छोड़ा,
नागिन भी विषहीन हो जाये, ये इस कदर जहर घोलती हैं,
की भारतीय नारी हैं ये, जो हर पल में अपना चरित्र बदलती है, परमित …..Crassa

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