याराना


तेरी-मेरी आँखों में एक इशारा हो जाए
तेरा जो रंग है वो मेरा हो जाए.
कुछ और नहीं माँगा है रब से मैंने
बस तेरे-मेरे दिल का याराना हो जाए.

Rifle Singh Dhurandhar

तुम #Harvard नहीं हो मेरा Heart हो प्रिये


तुम हार्वर्ड नहीं हो
मेरा हार्ट हो प्रिये।
तुम्हे पाने के लिए
रह गया मैं अकेला हूँ प्रिये।
तुम सिर्फ एक बिल्डिंग नहीं
मेरा ख्वाब हो प्रिये।
बस तुम्हारे साथ चलने के लिए
रह गया मैं अकेला हूँ प्रिये।
सारे ख्वाब टूट गए, अरमान टूट गए
पिता के लाडले गोद से छूट गए
की तुम सिर्फ एक मुकाम तो नहीं
मेरी सांसे हो प्रिये।
तुम्हे पाने के लिए
रह गया मैं अकेला हूँ प्रिये।

It was a dream to be here

Still, a dream exists in my heart

To be with you forever. 

Rifle Singh Dhurandha

गज-ग्राह संग्राम


दो नैनों के भवर में सारा जग डूबा है
हे जगत के स्वामी तुम्हारा भक्त डूबा है.
आधा पहर ढल गया और सागर अथाह है
हे जगत के स्वामी तुम्हारा भक्त डूबा है.
सम्पूर्ण बल क्षीण हुआ, ग्रीवा तक अब नीर है
अंत समय में स्वामी अब तुम्हारा ही सहारा है.

Rifle Singh Dhurandhar

बेचैन कर जाऊंगा


इस कदर टुटा हुआ हूँ
छूने से बिखर जाऊंगा।
इरादा तो ऐसा कुछ नहीं
मगर ठहर नहीं पाउँगा।

तेरी आँखों में कैद कई
इस खेल के माहिर धुरंधर
मैं तो हारा हूँ मगर
तुझे बेचैन कर जाऊंगा।

First two lines are not mine. It is modified from Gulam Ali jee ghazal.

परमीत सिंह धुरंधर 

ये वस्त्र अब दरिंदे


ये प्रेम की वादियाँ
ये रातों के शिकंजे।
ये जवानी का दौर
और ये तेज होते पंजें।

धमनियों में दौरने लगा है
अब लहू कुछ यूँ
की जिस्म को लगते हैं
ये वस्त्र अब दरिंदे।

तुम्हारी बाहों में आकार
यूँ आजाद होने का एहसास है
जैसे आसमा के तले
पंख पसारे परिंदे।

परमीत सिंह धुरंधर

तुम मिलो तो सही


मुस्करा – मुस्करा के शर्मा रही हूँ
तुम मिलो तो सही – २
शर्मा – शर्मा के मुस्कराऊंगी।

अभी तो बहके हैं मेरे कदम
तुम मिलो तो सही – २
संवर – संवर के तुम्हे बहका दूंगीं।

चलने लगी हूँ मैं ढलका के दुपट्टा
तुम मिलो तो सही – २
उड़ा – उड़ा के दुपट्टा चलने लगूंगी।

सारी रात देखती रहती हूँ मैं आईना
तुम मिलो तो सही – २
सारी रात बस तुम्हे देखती रहूंगी।

परमीत सिंह धुरंधर

दबा देना तुम पाँव माँ का


आवो,
तुमको प्यार करूँ
जीवन की इन बाधाओं में.
पहला पग मैं रखूंगा
काँटा आये जो राहों में.

तुम मुझको मोहन कहना
कहूंगा राधा तुमको मैं.
पहला पग मैं रखूंगा
काँटा आये जो राहों में.

थोड़ा दबा देना तुम
पाँव माँ का रातों में.
ख्याल रखूंगा जीवन भर
मैं बढ़कर अपनी साँसों से.

आवो,
तुमको प्यार करूँ
जीवन की इन बाधाओं में.
पहला पग मैं रखूंगा
काँटा आये जो राहों में.

परमीत सिंह धुरंधर

फिराक हम हो गए


जवानी के दिन थे और कुर्बान हम हो गए
उसकी एक नजर के आगे फिराक हम हो गए.
वो खिलने लगी हर दिन दोपहर सा
और रातों को ना बुझने वाला चिराग हम हो गए.

कसने लगा था अंगों पे उसके वस्त्र
ठहरने लगा था पाने – जाने वालो का उसपे नजर.
किस्मत में जाने वो किसके थी
मगर कुछ दिनों के बादशाह हम हो गए.

Dedicated to Firaq Gorakhpuri……

परमीत सिंह धुरंधर

फ्रांस जीत ले गइल विश्व ख़िताबवा


चोलिया के हमारा
मसकअता सियनवा।
बलम, गवनवा करा द ना.
कहियो लूट जाइ सारा जोवनवा
बलम, गवनवा करा द ना.

सबके लागल बा हमपे नयनवा
बलम, गवनवा करा द ना.
कहियो टूट जाइ धीर के बाँधवा
बलम, गवनवा करा द ना.
मुखिया चाहअता हमसे मिलनवा
बलम, गवनवा करा द ना.

भइल मुश्किल बा खेळल अब फगुआ
बलम, गवनवा करा द ना.
जवार सारा, चाहे पकड़े के कलइया
बलम, गवनवा करा द ना.
कहियो टूट जाइ ना त हमरो चारपाइयाँ
बलम, गवनवा करा द ना.

फ्रांस जीत ले गइल विश्व ख़िताबवा
बलम, गवनवा करा द ना.
हेमा ले अइली जीत के सोना के मेडलवा
बलम, गवनवा करा द ना.
कहियो टूट जाइ हमरो नथुनिया
बलम, गवनवा करा द ना.

परमीत सिंह धुरंधर

वक्षों पे कुरुक्षेत्र


विशाल वक्षों पे
प्रहार करो, वत्स।
ये करुक्षेत्र है तुम्हारा
अब शंखनाद करो, वत्स।

क्या है यहाँ तुम्हारा?
क्या है पराया?
मोह का त्याग कर
परमार्थ करो, वत्स।
विशाल वक्षों पे
प्रहार करो, वत्स।

जो आज है
वो कल मिट जाएगा।
कल जो आएगा
वो तुम्हे मिटा के जाएगा।
अतः कल के फल की चिंता
किये बगैर तीरों का संधान करो, वत्स।
विशाल वक्षों पे
प्रहार करो, वत्स।

नस – नस में उनके एक अग्नि
सी जल जाए.
ह्रदय में उनके पुनः मिलन
की आस रह जाए.
शिव सा कालजयी होकर
काम का संहार करो, वत्स।
विशाल वक्षों पे
प्रहार करो, वत्स।

अद्भुत दृश्य होगा
रक्तरंजित कुरुक्षेत्र होगा।
धरती से आकाश तक
सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड गवाह होगा।
हो एक – एक इंच उनका
तुम्हारी गिरफ्त में.
पाने शौर्य का ऐसे विस्तार करो, वत्स।
विशाल वक्षों पे
प्रहार करो, वत्स।

कब सृष्टि रुकी है?
किसी के लिए.
कब वक्त को किसी ने
बाँध लिया है खुद के लिए?
तुम नहीं तो कोई और
बनाएगा उन्हें अपना, जीत कर.
तुम बस एक साधन हो
इस लक्ष्य प्राप्ति का.
प्राप्त मौके को गवा कर
जीवन को ना बेकार करो, वत्स।
विशाल वक्षों पे
प्रहार करो, वत्स।

परमीत सिंह धुरंधर