End


Tears and dreams
there is no difference at the end of the journey.
Insult and honors
there is no difference at the end of the journey.
The end itself is an honor.
Defeat and win
there is no difference at the end of the journey.
Once you are in a ring, you are a winner.

Rifle Singh dhurandhar

फूल


जहाँ दर्द मिले दिल को उस दर पे नहीं जाना
बहुत धोखा है इश्क़ में, ये धोखा तुम नहीं खाना।
जो फूल खिल रहे हैं, मुरझा जाएंगे एक दिन
बिना खिले ही तुम मुरझा नहीं जाना।
माना की लम्बी है बहुत, अँधेरी ये रात
घबराकर कहीं तुम कोई ठोकर नहीं खाना।
बहुत हंस कर मिलते है अब लोग अब
ऐसे लोग भले नहीं होते
तुम ऐसे लोगो के गले लग नहीं जाना।
कट जाएगा ये भी वक्त तन्हाई से भरा
रिश्तों में दरार नहीं लाना।

Rifle Singh Dhurnadhar

परिंदा बेबस जिंदगी में


मैं तो परिंदा बेबस जिंदगी में
क्या सुबहा, क्या शाम मेरी?
उड़ता हूँ तो धरती छीन जाती
लौटता हूँ तो आसमा, कहाँ मेरी।

Rifle Singh Dhurandhar

पहाड बन गए


वो रूप अपना बिखेर कर बहार बन गयीं
हम दर्द को समेट कर दीवार बन गए.

वो इश्क़ में हमें एक रात दे गयीं
हम हमेट कर जिसे पहाड बन गए.

ना मिलती नजर तो, ना दीवाना होता
ये शहर हैं मेरा, मैं ना बेगाना होता।

किताबें चंद पढ़ कर वो बदलने लगे
निगाहों को फिर ना वो मयखाना मिला।

रहा दर्द दिल में सबब बनकर मेरे
फिर किसी और से मिलने का ना बहाना रहा.

किससे हां कहते दर्द-दिल अपना
दोस्तों का फिर वैसे ना जमाना रहा.

जाने दो जहां तक ये हवा जाए
ये घूँघट अब यूँ ना उठाया जाएगा।

समझ सको तो समझ लो कहानियाँ मेरी
मेरी खामोशियों में ये शहर अब गिना जाएगा।

परमीत सिंह धुरंधर 

वो तस्वीर ढूंढ कर देखिये


किस्मत का दौर देखिये
ख़्वाबों में दर्द देखिये
अगर आपने नहीं देखि है जिंदगी
तो कभी आकर मेरे घर देखिये।

हम दीवारों पे दर्पण नहीं रखते
हम अब उसमे अपना चेहरा नहीं देखतें
जुल्फों से घने इन अंधेरें में
कभी टहल कर देखिये।
अगर आपने नहीं देखि है जिंदगी
तो कभी आकर मेरे घर देखिये।

इजाजत ही नहीं देता है ये दिल
की ये हाथ किसी दिए को जलाये
ठोकरों के बीच से यूँ आप भी कभी
राहें बना कर देखिये।
अगर आपने नहीं देखि है जिंदगी
तो कभी आकर मेरे घर देखिये।

जब कभी ऐसे ही गुजर जाती हैं राते
खुली आँखों के सहारे
तो मेरी खिड़कियों पे, उषा की लाली
और गोरैयों का कलरव देखिये।
अगर आपने नहीं देखि है जिंदगी
तो कभी आकर मेरे घर देखिये।

कहीं मकड़ियों के जालें
कहीं बिखरें किताबों के पन्ने
इस तिलिश्म में कभी उनकी
वो तस्वीर ढूंढ कर देखिये।

परमीत सिंह धुरंधर 

इश्क़ के दास्ताँ


ए समंदर, मुझसे इश्क़ के दास्ताँ ना पूछ
हम राजपूतों की शान है, हम लुटा देतें है अपना सब कुछ.
वो दरिया हैं, बंध जाना नहीं है उन्हें कुबूल
और मैं बंध जाऊं, ऐसा नहीं मेरी नशों का खून.

O sea, do not ask me stories of love
We are Rajput, we are known to sacrifice everything we own for our love.
They are like streams, they don’t have to be tied
And I accept to be tied, that is not possible due to my lineage.

परमीत सिंह धुरंधर