इश्क़


मुझे इश्क़ में दर्द मिला
मुझे दर्द में इश्क़ मिला
मैं तन्हा रहा जिसकी चाह में
वो मुझे अंत में तन्हा मिला।

वो सुहागन, पत्नी, माँ, बहु, सास
ऐसे भी बनती, वैसे भी बन गयी.
उसे सिंदूर, साड़ी, पायल, कंगन
ऐसे भी मिलते, वैसे भी मिल गयी.

मेरे हालात कैसे भी हों?
उसे तब पैसों की चाह
और अब मोहब्बत की
प्यास रह गयी.

Rifle Singh Dhurandhar

रात


I don’t know what is in your mind
But I know what is in your eyes
It’s me, it’s me, and it’s just me, my queen.

I don’t know what is in your heart
But I know what is in your sight
It’s me, it’s me, and it’s just me, my queen.

पागल कर रही है अँखियाँ तुम्हारी
सारे शर्म को उतार दो तुम रानी
इस रात तक हम हैं, इस रात तक तुम हो
इस रात के बाद रह जायेगी बस एक निशानी।

I don’t know what will happen tomorrow
But I know what will happen tonight
It’s me and you, my queen.

Rifle Singh Dhurandhar

वो भी क्या दिन थे?


वो भी क्या दिन थे?
पिता के साथ में
हम थे हाँ लाडले
आँखों के ख्वाब थे.

जो भी माँग लिया
वो ही था मिल जाता
वो थे आसमान
और हम चाँद थे.

भाग्या प्रबल था
और हम भी प्रबल थे
वो कृष्णा थे हमारे
हम प्रखर थे उनके छाँव में.

Rifle Singh Dhurandhar

बदनाम – बेशर्म – पावन – खलिहान – खाट


ए मेरे दिलवर
मुझे प्यार करके तू
बदनाम कर दे आज-२.

फिर पाने को तुझे
ढूंढती रहूं
बेशर्म होके मैं
हर सुबहों -शाम.

मेरा रूप-रंग, यौवन,
ये साजों-श्रृंगार
छू कर इन्हें
पावन कर दे आज.

तू बरसे मुझपे
बादल बनके
मैं भींगती रहूं
सारी-सारी रात.

लूट जाने दे मुझे
खलिहान में अपने
इससे मीठी ना होगी
किसी आँगन की खाट.

Rifle Singh Dhurnahdar

बहुत याद आते हो पिता


बहुत याद आते हो पिता
इस समंदर में.
ये युद्ध है सत्ता का
ये सुख है सत्ता का
सब अधूरा है इस आँचल में.

अम्बर तक पंख पसारे
उड़ता हूँ.
फिर भी एक सूनापन है
इस जीवन में.

मौत का वरन मुस्करा कर
कर लेंगें
अगर उस तरह आप मिलोगे।
प्रेम है तो बस पिता के आलिंगन में.

Rifle Singh Dhurandhar

क्या लिखा है उसने मेरी लकीर में?


हम समंदर हैं दोस्तों
खारे रह गए इस जमीन पे.
कुछ मिला भी नहीं जिंदगी में
बस मांगते रह गए हम नसीब से.

उनसे इतनी थी हाँ मोहब्बत
हर दर्द सह गए हम ख़ुशी से.
कुछ मिला भी नहीं जिंदगी में
बस मांगते रह गए हम नसीब से.

वो जिनके लिए हम बने थे
वो खो गए कहीं इस भीड़ में.
कुछ मिला भी नहीं जिंदगी में
बस मांगते रह गए हम नसीब से.

खुदा भी नहीं जानता है
क्या लिखा है उसने मेरी लकीर में?
कुछ मिला भी नहीं जिंदगी में
बस मांगते रह गए हम नसीब से.

Rifle Singh Dhurandhar

Father and Ex


I missed my father
More than my ex
As that was the best father-son pair
That was selected by Nature.

My ex and I
Were just a choice made by us
And we were still looking
To find the best.

The love between my father and me
Was blind
Without any expectation
Full of appreciation and enjoyment.

The love with my ex
Was a force, which strength was
Proportional to my success rate
But my success rate was inversely proportional
To the availability of another successful man.

Rifle Singh Dhurandhar

पिता और मेरा प्रेम


पिता और मेरा प्रेम
जैसे गंगा की लहरों पे
उषा की किरणें
और प्रकृति मुस्करा उठी.

हर्षित पिता मेरी उदंडता पे
उन्मादित मैं उनकी ख्याति पे
पिता -पुत्र की इस जोड़ी पे
प्रकृति विस्मित हो उठी.

अभी जवानी चढ़ी ही थी
अभी मैं उनके रथ पे चढ़ा ही था
की प्रकृति ने
विछोह की घड़ी ला दी.

Rifle Singh Dhurandhar