उस जल की तमन्ना है


जहाँ पल न मिले पल को
उस पल की तमनन्ना है.
जहाँ कल ना बिछुड़े कल को
उस कल की तमनन्ना है.

कुछ भी नहीं है, बस बिजुरी के सिवा
बिन बिजुरी के बादल मिले
बस इतनी तमन्ना है.
कण – कण में अतृप्त है मेरी आत्मा
इसके कण – कण को जो भिंगो दे
उस जल की तमन्ना है.

परमीत सिंह धुरंधर

Be in P<0.05


For your dream you have to die,
Does not matter, how high you fly.
टूटे रिश्तों को बचा लो,
इसी में हैं सबकी भलाई।
The world is always unfair,
As, it goes behind the average.
If you want to excel,
You have to be in P<0.05.
For your dream you have to die,
Does not matter, how high you fly.

 

Parmit Singh Dhurandhar

Tell your ammi that you want to do PhD


Make me down baby,
Make me mourn.
Tell your ammi that,
You want to earn.
It’s not like,
Day or night.
You have to try,
And only try.
Tell your ammi that,
You want to learn.
Life is short,
And PhD is tough.
Tell your ammi that,
No marriage and no gold.
Your life is only Western,
And spectroscopy.
Make me down baby,
Make me mourn.
Tell your ammi that,
You want to earn.

 

Parmit Singh Dhurandhar

My only dream is that each and every girl should do PhD.

ख्वाब


सैकड़ों हैं संसार में,
जो तुमपे निसार हो जाएँ।
हम तो बस आपका,
दीदारे-ख्वाब रखते हैं.
आपकी खूबसूरती का ऐसा,
आयाम है.
की हर रात पलकों में,
तुम्हारा ख्वाब रखते हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर

She got a new man


The equation has changed,
The moment she got a new man,
For everything,
She started blaming me,
And running towards him,
However, I know
She is chasing an impossible dream.
I know he will squeeze,
She will enjoy,
But one day,
She will cry on her knee.
Because,
She is chasing an impossible dream.

Parmit Singh Dhurandhar

You are my dream gun


I am a crazy girl,
I want to make love.
No emotion, no charge,
No break-up, no heart,
Just want to make love.
You look perfect to me,
So come to me tonight,
And, we will have a drink.
You have a sharp tongue,
And, you are my dream gun.
So come to me tonight,
And, we will have red wine.
I am a crazy girl,
I want to make love.

Parmit Singh Dhurandhar

चारपाइयों की कसरत


दो पल की आरजू थी,
दो जिन्दगियाँ बदल गयीं।
उनके आँखों के काजल से,
रोशनियाँ बदल गयीं।
ठुकराती रहीं,
ता-उम्र वो मेरी मोहब्बत।
और जब भी मेले में मिलीं,
निशानियाँ बदल गयीं।
आज भी,
घूँघट में उनका चेहरा।
मगर जवानी ढलते-ढलते,
कई कहानियाँ बदल गयी.
चारपाइयों की कसरत,
भले मैंने नहीं की है.
पर दिया बुझाते-बुझाते,
कई चारपाइयां बदल गयीं।

परमीत सिंह धुरंधर

ख़्वाब


जब से सीना तुम्हारा उभरने लगा है,
गावं से शहर तक मौसम बदलने लगा है.
दुप्पटे के रंग से ही घायल हो रहे है यहाँ कितने,
और कितने,
बाँहों में भींचने का ख़्वाब सजोने लगे हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

तमन्ना


इन काली-काली आँखों में,
मैं काजल बनके बस जाऊँ।
कुछ प्यार-मोहब्बत की बातें,
कुछ चंदा-तारें ले आऊँ.
कभी बादल बनके बिचरूँ,
इन उड़ती-उड़ती तेरी जुल्फों में.
फिर कभी छम-छम करके बरसूँ,
तेरे उन्नत-उन्नत बक्षों पे.
तेरी गोरी-गोरी काया पे,
चन्दन सा मैं घिस जाऊँ।
कुछ प्यार-मोहब्बत की बातें,
कुछ हल्दी-उबटन लगाऊँ।

परमीत सिंह धुरंधर