पिघलता क़यामत


जो नजर में आ जाए वो ही नजाकत है
बाकी सब तो परदे के पीछे एक सियासत है.

उनका पर्दा है ए जमाना तुम्हारे लिए
मेरी बाहों में तो हर रात पिघलता क़यामत है.

परमीत सिंह धुरंधर

हुस्न की एक मल्लिका


वो जब हुस्न की एक मल्लिका बनीं
तो समझी की वो एक खुदा बनीं।
और तुरंत उनका फैसला आ गया
की वो अब से किसी और की बनीं।

परमीत सिंह धुरंधर

एक जन्नत आ गया है


ए दोस्त
दुश्मनों को बता दो
शहर में कोई नया आ गया है.

ये रंगत, ये लज्जत
ये नजाकत
अरे, पूरा – का – पूरा
एक जन्नत आ गया है.

परमीत सिंह धुरंधर

गरीबी में भी गुरुर रखती हैं


वो अपनी बाहों में समंदर रखती हैं.
तभी तो इस गरीबी में भी गुरुर रखती हैं.

ना जिस्म पे सोने – चांदी के गहने
ना लाखों – हजारों का श्रृंगार ना कपड़े
मगर राजा, रंक सभी नज़ारे गराये हैं उसपे
जाने क्या?
मैंले – कुचले, फटे – चिथड़े
अपने दुप्पटे में वो रखती है.

 

परमीत सिंह धुरंधर

मेरे बैलों को कोई पशु ना कहे


उनके जिस्म पे जो
ये गहने हैं
पैसों से तो सस्ते
पर पसीने से बड़े महंगे हैं.

कैसे उतार के रख दे?
वो ये गहने अपने जिस्म से
चमक में थोड़ी फीकी ही सही
मगर इसी चमक के लिए
मेरे बैल दिन – रात बहते हैं.

मेरे बैलों को कोई पशु ना कहे
हैं की उन्ही के बल पे
मेरे घर के चूल्हे जलते हैं
और उनके कर पे वस्त्र
और गहने चमकते हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर

सिलिकॉन – ट्रांसप्लांट ह्रदय में करवाती


अगर मोहब्बत में लड़कियाँ,
जिस्म को नहीं ह्रदय को देखतीं।
तो सिलिकॉन – ट्रांसप्लांट वक्षों में नहीं,
ह्रदय में करवाती।

अगर लड़कियों की मोहब्बत में,
मीरा – राधा सा प्रेम होता, और वासना न होती,
तो वो प्रेम में उम्र और जवानी ना देखतीं।

अगर लड़कियाँ इश्क़ में,
आशिकों का जेब ना टटोलती।
तो सैनिकों को राखी नहीं, प्रेम – पत्र भेजतीं।

 

परमीत सिंह धुरंधर

लड़कियाँ काबिल ही नहीं होती हैं


लड़कियाँ काबिल ही नहीं होती हैं,
वो श्रेष्ठ होती हैं, सर्वश्रेष्ठ होतीं हैं.
मगर इश्क़-मोहब्बत और वफ़ा में बस,
वो नेक नहीं, शरीफ नहीं, बल्कि फेक होती हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर