अब किस्से चलेंगे


मुझे रिश्तेदार बनाकर वो खुद गुनाहगार बन गया
अब किस्से चलेंगे उसके मेरे इश्क़ के.
जाने किसके लिए खुदा ने बनाया था उसे
मुझसे नजर मिलकार वो बदनाम हो गया
अब किस्से चलेंगे उसके मेरे इश्क़ के.

परमीत सिंह धुरंधर

जन्नत लुटाने को तैयार है खुदा


तुझे जवान करके, परेशान है खुदा
जिस रात से देखा है, हैरान है खुदा।

क़यामत लाने वाला, जाने कब लाएगा?
मगर आज क़यामत का शिकार है खुदा।

तेरे अंगों पे जब फिसलते हैं बादल की बूंदें
तो अपनी ही किस्मत पे शर्मशार है खुदा।

जन्नत खुद के लिए, और गरीबी इंसानों को दे दी
तेरे अंगों को चूमने के लिए, जन्नत लुटाने को तैयार है खुदा।

परमीत सिंह धुरंधर

जय गणपति


रूप विराट, नयन विशाल
तेज ललाट पे स्वयं सूर्य सा.

देवों के देव, प्रथम पूज्य
आशीष प्राप्त तुम्हे
स्वयं शक्ति-महादेव का.

परमीत सिंह धुरंधर

हे गणपति अब तो पधारो


हे गणपति अब तो पधारो
टूट रहा मेरा आस भी.
निरंतर असफलताओं के मध्य, हे अवनीश
कब तक करूँ और प्रयास भी?

हे गजानन, हे वक्रकुंड
अब तो रख दो मस्तक पे हाथ ही.
कुछ तो मिले सहारा प्रभु देवव्रता
कब तक भटकता रहूं?
मरुस्थल में यूँ असहाय ही.

एक आपका नाम जपकर हे गौरीसुता
सबका बेड़ा पार हुआ.
कब तक मैं पुकारूँ आपको हे गदाधर?
छूट रहा मेरा सांस भी.

आपका – मेरा अनोखा है रिश्ता, हे गजकर्ण
आप मेरे अग्रज, आप ही सखा
आप ही मेरे भाग्या भी.

अब तो निष्कंटक कर दो
पथ मेरा, हे गणाधाक्ष्य
बिन आपके इक्क्षा और आशीष के हे चतुर्भुज
रख नहीं सकता मैं एक पग भी.

हे गणपति अब तो पधारो
टूट रहा मेरा आस भी.
निरंतर असफलताओं के मध्य, हे अवनीश
कब तक करूँ और प्रयास भी?

परमीत सिंह धुरंधर

उस जल की तमन्ना है


जहाँ पल न मिले पल को
उस पल की तमनन्ना है.
जहाँ कल ना बिछुड़े कल को
उस कल की तमनन्ना है.

कुछ भी नहीं है, बस बिजुरी के सिवा
बिन बिजुरी के बादल मिले
बस इतनी तमन्ना है.
कण – कण में अतृप्त है मेरी आत्मा
इसके कण – कण को जो भिंगो दे
उस जल की तमन्ना है.

परमीत सिंह धुरंधर