When will it be again?


With such a sharp jawline
And a perfect smile
You are touching the base of my heart
Thorough your eyes.
I don’t know
When will it be again?

I want to hold
To make you much close
To feel your heart
Through your eyes
At least once again in my life
Because I don’t know
When will it be again?

The circular walk
Was never so much beautiful
And I don’t know
When will it be again?

I never realized
Throughout the whole night
You are a m of 3
As you look like just sixteen
I want it again
But don’t know
Will it be again?

Parmit Singh Dhurandhar

ठहाके लगने लगते हैं


जहाँ भी बैठ जाए
ठहाके लगने लगते हैं.
दौर कोई भी हो
आसमा पे इंद्रधनुष खिलने लगते हैं.
दुश्मन की उड़ जाती हैं नींदे
उनके इतिहास के किस्से खलने लगते हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

इस कदर तेरा ख्वाब है


सब पूछते हैं यहाँ की
क्यों मेरे हाथों में हर पल शराब हैं?
बिखर गयी है जिंदगी
इस कदर मुझे तेरा ख्वाब है.
तुझे क्या मिल गया?
इस दौलत से सजे सेज पे.
मेरी तो दुनिया बस
ग़मगीन और वीरान है.

Dedicated to Shiv Kumar Batalvi.

परमीत सिंह धुरंधर

चन्दन सी मुझपर बिखर जाती हो


मैं चाँद में
तुम्हारा रूप देखता हूँ.
तुम धुप में
मेरा बदन देखती हो.

मैं पसीने से भींगा तर-बतर
और तुम चन्दन सी
मुझपर बिखर जाती हो.

कैसे खुश हो तुम
बाबुल का महल छोड़ कर?
किसान की इस झोपडी में
ऐसा भी तुम क्या पाती हो?

परमीत सिंह धुरंधर

ए शिव तुम कहाँ हो-2?


सत्ता के जो लोभी हैं
उनका कोई रिश्ता नहीं।
जो लिख गए हैं कलम से
वो कोई इतिहास तो नहीं।

तुम क्या संभालोगे मुझे?
जब तुम्हारे कदम सँभालते ही नहीं।
तुम्हारा मुकाम अगर दौलत है तो
मेरी राहें वहाँ से गुजरती ही नहीं।

जमाना लिखेगा तुम्हे वफादार
पर हुस्न, जवानी में वफादार तो नहीं।
कुछ किस्से चलेंगे मेरे भी
पर उनमे आएगा तुम्हारा जिक्र तो नहीं।

ये अधूरापन ही है अब बस मेरा जीवन
पूर्णता की तलाश और चाहत तो नहीं।
तुम मिल भी जाओ किसी शाम तो क्या?
उस शाम में होगी अब वैसी बात तो नहीं।

Dedicated to Punjabi Poet Shiv Kumar Batalvi.

परमीत सिंह धुरंधर

कुछ किस्से


कुछ किस्से
वो कमर से लिख गयीं।
कुछ किस्से
वो नजर से लिख गयीं।

जब और लिखना
मुमकिन ना रहा.
वो अपने अधरों को
मेरे अधर पे रख गयीं।

परमीत सिंह धुरंधर