श्री राम जय राम, जय जय राम।
श्री राम जय राम, जय जय राम।
वर्षों से तप रहा है प्रभु, ये शरीर कामवासना में,
अब चाहता हूँ तपे ये तन, राम, आपकी आराधना में।
है कामना, हे राम, बनकर धूल रह जाऊँ आपके चरणों में,
अब चाहता हूँ स्वर फूटे, आपके चरणों की वंदना में।
श्री राम जय राम, जय जय राम।
श्री राम जय राम, जय जय राम।
आपके चरण ही हैं प्रभु राम, चारों धाम मेरे,
अब चाहता हूँ राम बसे, साँसों की हर माला में।
जो भटक रहा हूँ जग में अब तक, गलियारों की माया में,
अब चाहता हूँ मन रम जाए, राम, आपकी ही छाया में।
मिट जाएँ मेरे मोह सभी, मिट जाएँ मन के अंधियारे,
अब चाहता हूँ दीप जलाऊँ, आपके पावन प्रार्थना में।
जय सिया राम, जय जय सिया राम।
जय सिया राम, जय जय सिया राम।
तन की तृष्णा दूर हो प्रभु, मन को मिले विराग आपका,
अब चाहता हूँ जीवन बीते, केवल आपकी साधना में।
न धन माँगूँ, न यश माँगूँ, न माँगूँ सुख संसारों का,
बस इतना वरदान मिले प्रभु, रहूँ सदा आपकी करुणा में।
जब-जब मन में उठे विकार, तब आपका नाम सँभाले,
अब चाहता हूँ चित्त लगे बस, राम-राम की उपासना में।
श्री राम जय राम, जय जय राम।
श्री राम जय राम, जय जय राम।
मेरी वाणी राममय हो, मेरे नयनों में राम बसें,
मेरे कर्मों की हर धारा बहती रहे आपकी सेवा में।
जो कुछ मेरा, आपको समर्पित, तन-मन-धन और प्राण भी,
अब चाहता हूँ मिट जाऊँ प्रभु, आपकी ही भावना में।
अंत समय जब साँसें थम जाएँ, दुनिया पीछे छूट जाए,
तब भी निकले नाम तुम्हारा, मेरे अंतिम उच्चारण में।
जय सिया राम, जय जय सिया राम।
जय सिया राम, जय जय सिया राम।
न कोई इच्छा शेष रहे, न कोई शिकवा मन में हो,
बस चरणों की धूल मिले प्रभु, इस जीवन की साधना में।
जन्म-जन्म की प्यास बुझा दो, दर्शन देकर हे रघुराई,
अब चाहता हूँ मिल जाऊँ तुमसे, भक्ति की उस धारा में।
वर्षों से तप रहा है प्रभु, ये शरीर कामवासना में,
अब चाहता हूँ तपे ये तन, राम, आपकी आराधना में।
श्री राम जय राम, जय जय राम।
श्री राम जय राम, जय जय राम।
है कामना, हे राम, बनकर धूल रह जाऊँ आपके चरणों में,
अब चाहता हूँ स्वर फूटे, आपके चरणों की वंदना में।
आपके चरण ही हैं प्रभु राम, चारों धाम मेरे,
अब चाहता हूँ राम बसे, साँसों की हर माला में।
जय सिया राम, जय जय सिया राम।
श्री राम जय राम, जय जय राम।
श्री राम जय राम, जय जय राम।
जय सिया राम, जय जय सिया राम।
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