कहते हैं-3


कहते हैं की सफर जितना तन्हा है तेरा
उतने ही मजबूत इरादे हैं तेरे
मंजिल तक आते -आते,
महफ़िल में तुझे भी बुलाया जाएगा।

कहते हैं की गैरों की बस्ती में
अगर घर बनाया है
मेहमान तो बहुत होंगे,
अपना कोई भी एक रात न ठहर पायेगा।

कहते हैं खुदा ने भी क्या?
बनाई है जिसे कहते हैं किस्मत?
हर सफलता को मेहनत और
असफलता को किस्मत बताया जाएगा।

कहते हैं की उसने एक घर बसा लिया है
अब कुछ दिनों में उसे मंदिर बताया जाएगा।
कहते हैं की मुझे दर्द में रख तू गम ना कर
तू जो दर्द में आया, मेरा गम छलक जाएगा।

कच्ची हो या पक्की,
सड़क दूरियां मिटाती है
माँ कैसी भी हो, किसी की भी हो
रोते बच्चे को ना देखा जाएगा।

कहते हैं की होश उड़ा देती हैं
उसकी आदाएं, सब्र कर,
जवानी ढलते – ढलते,
उसको भी भुलाया जाएगा।

Rifle Singh Dhurandhar

कहते हैं-2


कहते हैं की मौसम बदल जाए
तो क्या होगा?
जो चला गया हैं
वो लौट के आएगा क्या?

कहते हैं की शादी वक्त रहते कर लो क्राससा
तो क्या होगा?
वो मेरी महफ़िल में आके नाचेगा क्या?

कहते हैं की सभी सूना रहे हैं
अपनी -अपनी बेगम के किस्से।
मगर किसी ने नहीं कहा
आज माँ-बाप ने भरपेट खाया है क्या?

कहते हैं की मैंने जिंदगी में
कुछ नहीं सीखा
जिसने सीखा, उसे बीबी को
खुश रखना आया है क्या?

कहते हैं की दीवारों के भी कान होते हैं
मगर पडोसी, पडोसी का दर्द समझ पाया है क्या?

Rifle Singh Dhurandhar

कहते हैं


कहते हैं की धुप में ना निकला करो
जवान बदन है, कुम्हला जाएगा।
ऐसे अनजान सड़क पे ना जाया करो
कोई भौंरा चुम के उड़ जाएगा।

कहते है की वो बचपन था, सुन्दर था,
जब तुम साथ में थे पिता
अब हालात ऐसे हैं, कोई कही से,
कभी भी लंगड़ी लगा जाएगा।

कहते हैं की खुद को संभाल लो
गिर जाने से पहले
भीड़ में अब कौन है?
जो दौड़ के तुम्हे उठाने आएगा।

कहते हैं की अपना दर्द किसी से ना कहो
जमाना फिर तुम्हे पत्थर का नहीं कहेगा।

Rifle Singh Dhurandhar

लाठाधीश


वीर तुम धनानंद, लाठाधीश हो.
उठो, बढ़ो ऐसे की सिकंदर तक खौफ हो.
जुल्म की तलवार लिए आ गया है वो
भारत की सरहदों पे कोई हाहाकार हो
उसके पहले लठ से अपने प्रहार कर दो.
वीर तुम धनानंद, लाठाधीश हो.
उठो, बढ़ो ऐसे की सिकंदर तक खौफ हो.

देव तक तुमसे यहाँ भयभीत हैं
पुराणों में वर्णित तुम्हारा गीत है.
मगध के मस्तक के तुम चाँद हो
यदुवंशियों के बल का तुम प्रमाण हो.
तो उठो और अपने मुष्ठ का एक प्रहार दो.
वीर तुम धनानंद, लाठाधीश हो.
उठो, बढ़ो ऐसे की सिकंदर तक खौफ हो.

उस तरफ तलवारे थी जंग के लिए
इस तरफ से लठ लिए लाठाधीश थे चले.
गंगा की लहरों ने भी देखा था वो दिन
धरा पे लठ के प्रहार से, उस तरह यवन थे गिरे।
बिना खून बहाये ही रण को जीत लो.
वीर तुम धनानंद, लाठाधीश हो.
उठो, बढ़ो ऐसे की सिकंदर तक खौफ हो.

Rifle Singh Dhurandhar

ए पिता तुम हो कहाँ?-2


ए पिता तुम हो कहाँ, इस गगन के तले?
घिर चुका हूँ मैं चारो और से यहाँ बिन तेरे।
कोई राह नहीं, जो मंजिल तक चले
कोई सहारा नहीं, जिसको हम थाम लें.
किसको देखूं, किसको पुकारूँ यहाँ?
सभी मग्न हैं यहाँ हार पे मेरे।
जो कल तक मौन थे अपने सर को झुकाये
वो भी मुझपे तीर चलाने हैं लगे.
गिर रहा हूँ पल-पल में, क्या सम्भालूं अब?
सारे जख्म अब गहरे होने हैं लगे.
ए पिता तुम हो कहाँ, इस गगन के तले?
रोंदने लगे हैं, शत्रु पाकर मुझे अकेले।
आखरी साँसें हैं, आखरी इंतज़ार
लगता हैं तुम अब आकर बचा लोगे मुझे।

Rifle Singh Dhurandhar

ए पिता तुम हो कहाँ?


ए पिता तुम हो कहाँ, इस गगन के तले?
घिर गया हूँ चारों ओर से, मैं यहाँ बिन तेरे।
काँटे जो फूल बनकर मिलते थे
अब फूल भी शूल बन कर चुभने हैं लगे.
तेरा लाडला है धूल में धूसरित पड़ा
कब तक महेश्वर, ध्यान में रहोगे आँखें मूंदे?
उल्लास, उत्साह, उन्माद वो मेरा
हर प्रयास मेरा, अब एक बोझ सा लगे।
अधर-सुकोमल, वक्ष-सुडोल,
मेनका का आलिंगन भी विष सा लगे.

Rifle Singh Dhurandhar

पिता


तब तक साँसों का मेरे संचार रहे
जब तक पिता संग तेरे मेरा संसार रहे.
बिन तेरे धरा पे जीवन ही क्या?
तेरे चरणों पे हर जीवन निसार रहे.

Rifle Singh Dhurandhar

कोई नंगा दिख जाए


मोहब्बत इतना भी ना करो
की शिकायतें बढ़ जाए.
दूरियां इतनी भी ना कम हो
की दीवारें उठ जाए.
सभी इंसान हैं यहाँ
सबकी अपनी-अपनी हैं जरूरतें
खिड़कियों से ना झाँका करो
की कब -कहाँ, कोई नंगा दिख जाए.

Rifle Singh Dhurandhar

रात


I don’t know what is in your mind
But I know what is in your eyes
It’s me, it’s me, and it’s just me, my queen.

I don’t know what is in your heart
But I know what is in your sight
It’s me, it’s me, and it’s just me, my queen.

पागल कर रही है अँखियाँ तुम्हारी
सारे शर्म को उतार दो तुम रानी
इस रात तक हम हैं, इस रात तक तुम हो
इस रात के बाद रह जायेगी बस एक निशानी।

I don’t know what will happen tomorrow
But I know what will happen tonight
It’s me and you, my queen.

Rifle Singh Dhurandhar