मोदी विजय – गाथा 2019


मन भी समर्पित, तन भी समर्पित
ए धरती तेरे लिए.
लौट के फिर से आया हूँ
माँ, तुझको ही सजाने के लिए.

ख्वाब मेरा है, अरमान मेरा है
कोना – कोना लहलहा दूँ फसल से
विश्वास रखो भारत के किसानों
मोदी खड़ा है सिर्फ तुम्हारे लिए.

साँसे हैं जबतक इस तन में
ख्याल रखूंगा जन – जन का.
लौटा हूँ आशीष लेकर
बाबा केदारनाथ जी से
हिन्द के वीर जवानों के लिए.

मन भी समर्पित, तन भी समर्पित
ए धरती तेरे लिए.
लौट के फिर से आया हूँ
माँ, तुझको ही सजाने के लिए.

परमीत सिंह धुरंधर

हुस्न बेमिसाल था


इश्क़ ना उनसे हुई तो नशा किताबों में ढूंढा
नाम शमा हासमी तो दुआ मजारों पे पढ़ा.

किस्मत से जंग में फ़कीर है हर कोई
उनका हुस्न बेमिसाल था तो साथी दौलत को चुना।

परमीत सिंह धुरंधर

भंवर


वो किताबों के मेरे पन्ने बने हैं
वो शहर की मेरी दुकानें बने हैं.

ढूंढती है जिसे नजर मेरी प्यासी
वो ख़्वाबों के मेरे समंदर बने हैं.

वो मासूम सा चेहरा
छोड़ गया मुझे भंवर में
जिसके लिए हम दीवाने बने हैं.

These lines are for someone from Raebareli.

परमीत सिंह धुरंधर

हाले – जिंदगी


दास्ताने – जिंदगी तो सबने लिखी है
मैं पढ़ने बैठा हूँ दास्ताने – जिंदगी।

शौक समंदर का रखता हूँ
इस शौक ने कर दिया तन्हा जिंदगी।

उलझनों में उलझ के जो थम जाते हैं
कब कोई उनसे पूछता है फिर हाले – जिंदगी?

उनकी निगाहों को देख समझ गया था
ख़ाक के सिवा कुछ नहीं मोहब्बत में जिंदगी।

दुवाओं का असर है या कर्म का फल है
बेगानों की बस्ती में अब तक टिकी है जिंदगी।

परमीत सिंह धुरंधर

गरीबों की सुन ले ए दाता-III


टूटे हैं सारे ख्वाब इनके
बनके आँसू
छलक -छलक के.
जाने कैसे ज़िंदा हैं ये
जीवन में इतना भटक – भटक के.
कौन तोड़ेगा इनकी बेड़िया
एक तेरे सिवा
गरीबों की सुन ले ए दाता,
इनका कोई नहीं, तू विधाता।
इनकी आँखों के आगे
रहता है बस अँधेरा।
गरीबों की सुन ले ए दाता,
इनका कोई नहीं, तू विधाता।

परमीत सिंह धुरंधर