भोलेनाथ


वक्त के समंदर का अब मुझे सिकंदर नहीं बनना
लहरों का किनारा भी मुझे अब नहीं बनना।
मुझे बस अपने प्रभु के चरण मिल जाए
भोले, मुझे बस आप के चरणों का धूल है बनाना।

RSD

मंजिल


टूटने से पहले तेरी याद आयी है
ये कैसी शाम है जो तेरे बिना आयी है.
पिता बुद्धि थे, पिता ही वरदान
आज मैं तुच्छ हूँ, और लाचार
ना कोई राह है ना मंजिल
मैं भटक रहा हूँ अब दिन-रात
आज मैं शूद्र हूँ और लाचार।

RSD

चाल


हर धार को
किनारों से मिलना है।
मिलकर किनारों से
मिटना है।

प्रकृति की यही
एक चाल है।
इसी चाल में फँसकर
सबको पीसना है।

हमको दिल वहीं रमाना है,
जहाँ प्रभु का साया है।

RSD

खोलकर जटा, भोले, छोड़ दो गंगा की धार


खोलकर जटा, भोले, छोड़ दो गंगा की धार,
माँ गंगे की गोद में हो, भोले, जीवन का उद्धार।
पाप का नाश हो, भोले, बढ़े पुण्य अपार,
माँ गंगे की गोद में हो, भोले, जीवन का उद्धार।
खोलकर जटा, भोले, छोड़ दो गंगा की धार,
माँ गंगे की गोद में हो, भोले, जीवन का उद्धार।

तप रहे तपस्वी, भोले, जल रहा है संसार,
सृष्टि पर, भोले, बढ़ रहा है भार।
झूमकर, भोले, छोड़ दो गंगा की धार,
अब तो सुन लो, भोले, भगीरथ की गुहार।
खोलकर जटा, भोले, छोड़ दो गंगा की धार,
माँ गंगे की गोद में हो, भोले, जीवन का उद्धार।

हलाहल को बाँधकर, भोले, नीलकंठ बन जाते हो,
डमरू पर अपने जब चाहो, प्रलय को नचाते हो।
फिर ऐसा क्या है, भोले, जो नहीं सुन रहे पुकार?
खोलकर जटा, भोले, ढक दो अब आकाश।
खोलकर जटा, भोले, छोड़ दो गंगा की धार,
माँ गंगे की गोद में हो, भोले, जीवन का उद्धार।

RSD

भोलेनाथ मेरे नाथ


भोलेनाथ, मेरे भोलेनाथ, मेरे भोलेनाथ, मेरे भोलेनाथ,
मधुर बहुत है, पिता, आपका लगता मुझको नाम।
कानों में अमृत घुल जाए, हों स्वप्न सब साकार,
जब दिख जाते हो मुझको, भोले, झूमते नंदी पे सवार।

भोलेनाथ, मेरे भोलेनाथ, मेरे भोलेनाथ, मेरे नाथ,
और क्या माँगे, भोले, जब बैठे ही हैं तेरे द्वार?
एक बार चखा दो, पिता, अपने हाथों से बस भांग।
जीवन हो जाए पूर्ण, पिता, जो तुम पिला दो भांग।

भोलेनाथ, मेरे भोलेनाथ, मेरे भोलेनाथ, मेरे नाथ,
क्या है अमृत और क्या है विष, जो तेरी गोद में खेला।
मन तो माँगे बस, हाँ भोले, डम-डम डमरू,
और तुम्हारे हाथों से, भोले, बस थोड़ी-सी भांग।

RSD

वक्त और इंसानियत


वक्त ने सभी को वो राह दे दी है,
जहाँ हम न बदले, तो फिर कोई राह न होगी।
इंसान वही है, जो इंसान का रहे,
ये बात न रही, तो दिल से कोई बात न होगी।

नफ़रत की हवाओं में क्या रखा है आखिर,
मोहब्बत न रही तो कोई सौगात न होगी।
चेहरों पे मुस्कानों का मेला तो लगेगा,
पर सच्चे दिलों की कहीं जमात न होगी।

जो दर्द में भी औरों का सहारा बन जाए,
ऐसे इंसानों से फिर मुलाकात न होगी।
रिश्ते अगर मतलब से ही जिए जाएंगे,
तो फिर दिलों में कभी-कोई चाह न होगी।

चलो आज फिर इंसानियत को जगा लें,
की बेटियों की खौफ में रात न होगी।
वक्त ने सभी को वो राह दे दी है,
जहाँ हम न बदले, तो फिर कोई राह न होगी।

Dedicated in memory of the Bhopal Katara Hills incident.

सुकून


**होता जो शोहरत में ही नशा,
तो मयखाने में टूटे दिल न होते।
मिलता जो सुकून बाहों में,
तो सुकून के लिए ये तलाक न होते।

होता जो वफ़ा में कोई असर,
तो रिश्तों में ये फासले न होते।
जो मिलती मोहब्बत बेखौफ़ होकर,
तो दिल यूँ दर-ब-दर न होते।

जो समझ लेते लोग इश्क़ की जुबां,
तो खामोश ये सिसकते लफ्ज़ न होते।
अगर सच्चा होता हर एक सफर,
तो मोड़ पे यूँ बिछड़ते हम न होते।

जो मिलती हर चाहत पूरी तरह,
तो अधूरी ये दास्तां न होते।
अगर दिलों में बस इज़्ज़त होती,
तो ये टूटे हुए आशियां न होते।

अगर वक्त ही वफ़ा निभा जाता,
तो यादों में यूँ जख्म न होते।
जो मिल जाती हर दुआ मुकम्मल,
तो आँखें ये नम न होते।**

समंदर


रहा न समंदर भीड़ में कभी ,
चाहे ह्रदय में वेदना जितनी भी उठी.

लहरों ने सब कुछ छुपा लिया भीतर,
किनारों पे दुनिया को बस ख़ामोशी ही मिली।

RSD

मुकाम


जो अपनी निगाहों से अनदेखा करते हैं हमें,
हम तो उन्हें ही बस देखा करते हैं।
मोहब्बत उस मुकाम पे है मेरी कि बस,
तन्हाई में शहनाई सुना करते हैं।

ख़ामोश लम्हों में उनका नाम लिया करते हैं,
दिल की हर धड़कन को उनसे जोड़ा करते हैं।
वो पास हों या दूर, क्या फ़र्क पड़ता है?
हम तो हर ख़्वाब में उन्हें जिया करते हैं।

रातों की चादर में उनकी यादें सजी रहती हैं,
आँखों में तस्वीर उनकी बसी रहती है।
क़िस्मत से मिले या ना मिले वो कभी,
हम तो हर दुआ में उन्हें माँगा करते हैं।

RSD

दास्ताँ


लहरों का किनारों से कोई रिश्ता नहीं,
ये मज़बूरी है, कोई इश्क़ की दास्ताँ नहीं।

तुमने घर बसा लिया, बच्चे भी कर लिए,
पर आँखें कह रही हैं—ज़ख्म तुम्हारा भरा नहीं।

आसमान के परिंदे ज़मीन पर बैठे,
दाना चुगते, पंख समेटे,
यहाँ उड़ानों से कभी किसी का पेट भरता नहीं।

हम चले थे साथ कुछ दूर तक,
रास्ते बदल गए, मुक़ाम बिखर गए,
अब कोई नाम मेरे होंठों पे ठहरता नहीं।

लहरों का किनारों से कोई रिश्ता नहीं,
ये मज़बूरी है, कोई इश्क़ की दास्ताँ नहीं।

RSD