धीरे-धीरे अंगिया अंगार भइल बा
चढ़त फगुआ में बुढ़वा जे यार भइल बा.
मार-मार मुस्की बेहाल भइल बा
फागुन में बुढ़वा जे यार भइल बा.
सुन अ सखी देखा कहा तानी
चुनियाह दूल्हा कउनो बुढ़वा ही , काहे ?
चुनार-चोली सब नाश भइल बा.
चढ़त फगुआ में बुढ़वा जे यार भइल बा.
घड़ी -घड़ी कहे की देखे के बा मन
सजल, सवरल सब दुस्वार भइल बा.
चढ़त फगुआ में बुढ़वा जे यार भइल बा.
सुन अ सखी देखा कहा तानी
चुनियाह दूल्हा बुढ़वा ही , काहे ?
साया -साड़ी सब नाश भइल बा
चढ़त फगुआ में बुढ़वा जे यार भइल बा.
सुतल -बइठल सब दुस्वार भइल बा
चढ़त जवानी में बुढ़वा यार भइल बा.
सारा मिथिलांचल में कहाँ केहू के जोर?
आईनी छपरा त देखनी ह भोर.
पोर -पोर हमार दुखा गइल बा.
चढ़त जवानी में बुढ़वा यार भइल बा.
सुन अ सखी देखा कहा तानी
चुनियाह दूल्हा छापरहिया ही
साया -साड़ी सब नाश भइल बा
फागुन में बुढ़वा जे यार भइल बा.
उथल-बइठल सब काल भइल बा.
चढ़त जवानी में बुढ़वा यार भइल बा.
दिल्ली के ताज छोड़ देहनी
बनल मुमताज छोड़ देहनी
देखनी जे काँधे पे उनकरा ह हल
चरल हरियर घाँस छोड़ देहनी।
सुन अ सखी त कहा तानी
चुनियाह दूल्हा भोजपुरिया ही
खेत-खलियानी, गाछी-बथानी
सारा बांसवारी, खूब पाप भइल बा
चढ़त जवानी में बुढ़वा यार भइल बा.
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