God is here


Let’s live together
To achieve something better
You are not alone
Don’t keep any fear
Because God is here.

God is here
To protect your smile
And make you happy
He is sending His blessing
Through the sun and the moon
Through the snow and the air
As God is here.

You call Him Jesus
For me, He is Rama
He is within you
He lives in my heart too
The whole world belongs to him
And we are just His flavors
So God is here.

Nothing can stop you
Until you give up
He has all plans for your success
He is always in your side
So don’t ask for any favor
God is here.

Parmit Singh Dhurandhar

माहिर


निकला था राजकुमार सा
अब मुसाफिर हो गया हूँ.
ए जिंदगी देख तेरे इस खेल में
एक मासूम मैं, कितना शातिर हो गया हूँ?

देखता था हर एक चेहरे में माँ और बहन ही
पर इनकी नियत और असलियत देख कर
मैं भी अब माहिर हो गया हूँ.

परमीत सिंह धुरंधर

दूसरा चिराग नहीं दिखता


यूँ तो दोस्त कई हैं इस शहर में
पर तुम सा दुश्मन दूसरा नहीं मिलता।

कौन कहता है की तुम अकेले रह गए हो इस जीवन में?
मुझे अंधेरों में जलता कोई दूसरा चिराग नहीं दिखता।

शौक किसे नहीं तेरी इन लबों का?
मगर इन लबों पे वफ़ा भी तो नहीं मिलता।

दर्द किसको दिखायें इस जमाने में अपना?
जीवन में दूसरा पिता नहीं मिलता।

तारीफों का शब्द


क्या किस्मत पाई है तुमने भी Crassa?
तुम सा शहर में कोई दूसरा नहीं मिलता।

कितना भी काम आ जाए हम किसी के
अब वो तारीफों का शब्द नहीं मिलता।

परमीत सिंह धुरंधर

हुस्न की एक मल्लिका


वो जब हुस्न की एक मल्लिका बनीं
तो समझी की वो एक खुदा बनीं।
और तुरंत उनका फैसला आ गया
की वो अब से किसी और की बनीं।

परमीत सिंह धुरंधर

बादल बरसने से इंकार करने लगे हैं


बादल बरसने से इंकार कर रहे हैं
हवाओं का रुख भी बदलने लगा है
फूल, कलियाँ, भौरें, सब मुख मोड़ने लगे हैं.
ए दिल ये किस मोड़ पे आ गया हूँ ?
चाँद, तारे, सब राहें बदलने लगे हैं.
किस से कहें हाले-दिल अपना?
हर चेहरा मुझे देख के नकाब पहनने लगा है.
बादल बरसने से इंकार करने लगे हैं.

जो सत्ता में हैं, वो मेरे अब साथी नहीं
जो विपक्ष में हैं, वो अब साथ आते नहीं।
वो जो अब तक मेरी हर परेशानी में
मेरे पास बैठे थे.
वो जो अब तक अपनी हर परेशानी में
मुझे अपने पास बुलाते थे.
मुझसे सम्मिलित हर समीकरण
वो अब बदलने लगे हैं.
बादल बरसने से इंकार करने लगे हैं.

नजरों का बस एक फेर है जिंदगी
वो जो मेरे थे कल तक
अब मुझसे कतराने लगे हैं.
वो जो मुझसे पूछ कर सवरते थे
वो जो मेरे कहने पे रंग बदलते थे
इस कदर बदल गया है राहे -सफर उनका
की भीड़ को मेरे खिलाफ उकसाने लगे हैं.
बादल बरसने से इंकार करने लगे हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

जन्नत में ७२ हूरों के साथ


वो हमको बारूद, उनको संदूक दे गए
जन्नत में ७२ हूरों के साथ के लिए
मासूमों के हाथों में बन्दूक दे गए.

कहते हैं की वहाँ जवानी ढलती नहीं
और हूर बाहों से दूर छिटकती नहीं।
उस परुषार्थ-विहीन, माँ के दूध रहित
जवानी के लिए, माँ की गोद सुनी कर गए.

परमीत सिंह धुरंधर