लाठाधीश-2


वो कौन हैं जिसपे वसुंधरा हर्षित है?
वो कौन है जिसपे हिमालय गर्वित है?
वो कौन है जिसे गंगा है पुकारती?
वो कौन है जो मगध की तस्वीर है?

दर्प जिसके मुख पे, भल दिव्यमान है
जब लठ लिए लाठाधीश है रण में
तो क्या सिंकदर और क्या काल है?

वीर तुम धनानंद, लाठाधीश हो
उठो, बढ़ो ऐसे की सिकंदर तक खौफ हो.
प्रखर, प्रबल, प्रचंड, प्रवीण हो
परांगत हर विद्या में, हर निति में निपुण हो.
नरों में स्वयं तुम इंद्रा हो
संपूर्ण आर्यावर्त के तुम सिंह हो.
इस पुण्य वसुंधरा पे तुम पूजित हो.
रूप में कामदेव, रण में परशुराम हो
विद्या – ज्ञान में साक्षात् वशिष्ठ हो.

वीर तुम धनानंद, लाठाधीश हो
उठो, बढ़ो ऐसे की सिकंदर तक खौफ हो.

Rifle Singh Dhurandhar