भोलेनाथ आपकी जो कृपा हो जाए


भोलेनाथ आपकी जो कृपा हो जाए
ये भगीरथ भी सनाथ हो जाए.
है जीवन में मेरे भी कुछ अभिलाषा हाँ प्रभु
आप देख लो, तो सारी ही पूर्ण हो जाए.
आप त्रिपुरारी, त्रिलोकी, महादानी भोलेनाथ
आप देख लो, तो रघुकुल का कल्याण हो जाए.

आज भंगिया थोड़ा तो चखा दे ए भोला


मैं तन्हा -तन्हा सा एक मुसाफिर हूँ भोला
मैं भटक रहा हूँ, इतना काफिर हूँ भोला।
बस दो ही पल संग मुझे बिठा ले ए भोला
आज भंगिया थोड़ा तो चखा दे ए भोला।
मैं लुटा-हारा सा एक स्वार्थी, तू महादानी ए भोला
मैं भटक रहा हूँ, इतना पापी हूँ भोला
बस दो ही घडी, चरणों में बिठा ले ए भोला
आज भंगिया थोड़ा तो चखा दे ए भोला।
मैं माया-मोह में तू निर्मोही ए भोला
मैं भटक रहा हूँ, इतना कपटी हूँ, भोला।
बस दो ही क्षण गले से लगाले ए भोला
आज भंगिया थोड़ा तो चखा दे ए भोला।

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हमार जोगिया


डिम -डिम डमरू बजावे ला हमार जोगिया
रे हमार जोगिया।
मंद -मंद मुस्काये ला हमार जोगिया
रे हमार जोगिया।
दिन-भर बसहा घुमाये ला हम्मर जोगिया
रे हमार जोगिया।
बस भांग-धतूरा ही चाहे ला हमार जोगिया
रे हमार जोगिया।
दिन-भर गंगा में नहाये ला हमार जोगिया
रे हमार जोगिया।

हमार जोगिया हो हमार जोगिया


डम-डम डमरू बजावे हमार जोगिया
हमार जोगिया हो हमार जोगिया।
बस भांग-धतूरा से ही खुश हो जाए
हमार जोगिया हो हमार जोगिया।
अइसन सीधा नु बाटे हमार जोगिया।
हमार जोगिया हो हमार जोगिया।

दिन-भर नंदी संग घूमे ज्वार जोगिया,
हमार जोगिया हो हमार जोगिया।
माथे पे चंदा, ललाटे भभूत
देहिया पे भुजंग झुलावे हमार जोगिया।
हमार जोगिया हो हमार जोगिया।

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दुप्पट्टा


तुम लिए जा रही जवानी, यूँ दुप्पट्टा डाल के.
हम कैसे जियेंगे रानी, बिना तुम्हे देखें?
अंग-अंग से गदराई हो, जैसे सावन की बदली,
हम कैसे जियेंगे रानी, बिना इनमे भींगें?

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लहरों पे घर


डूबा हुआ हूँ इस कदर तेरी निगाहों में
की अब बस घुल जाने की तमनन्ना है.
किस कम्बख्त को किनारा चाहिए यहाँ?
अब तो बस लहरों पे घर बनाने की तमन्ना है.

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ये बताना कभी


कई फैसले जिंदगी के रुलाते हैं हर घडी
ना कोई सुकून हैं, ना कोई मंजिल ही.
इंसान को हर पल में सोचना है यही
की कितनी प्यास है और कितना पीना है जरुरी?
ता उम्र मैं भागता रहा जिन चाहतों के पीछे
पाकर उनको भी प्यास मिटती तो नहीं।
ए खुदा क्या लिखी है किस्मत मेरी?
हर दर्द की दवा है, बस मेरे ही दर्द की नहीं।
मुस्करा रहा है वो आज भी मुझे ही देख कर
की वक्त के साथ हालात मेरे बदलते ही नहीं।
हुस्न की वेवफाई पे कितना लिखूं ?
एक रात के बाद वो पहचानता भी नहीं?
कस्मे-वादे पे ना जाइये इनके, इनके आँचल में,
फरेब के आलावा कुछ मिलता भी नहीं।
क्या सोच कर हुस्न को बनाया था खुदा, ये बताना कभी?
जिस दर्द में हम जी रहे हैं, क्या उसे उठाया है कभी?

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माँ की ममता और पिता का दुलार


माँ की ममता और पिता का दुलार,
संसार में बस ये ही दो हैं भगवान्।
फिर भी मन भटकता है, कितनो के द्वार
बस पाने को जीवन में प्यार।

माँ की ममता और पिता का दुलार,
संसार में बस ये ही दो हैं भगवान्।
ये ही मेरे शिव हैं, ये ही मेरे विष्णु
इनकी चरणों में हैं चरों मेरे धाम.

माँ की ममता और पिता का दुलार,
संसार में बस ये ही दो हैं भगवान्।
और किसने लुटाये हंस-हंस के अपने स्वप्न
और कर दी तुमपे अपनी खुशियाँ निसार।adher

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हे ग़ालिब


हे ग़ालिब, उनके हुस्न पे तुम क्या लिख रहे हो?
जो भी लिख रहे हो, मेरा दिल लिख रहे हो.
जानता शहर है की जीना है मुश्किल।
मेरे इस दर्द को ही तुम दवा लिख रहे हो.
हे ग़ालिब, उनके हुस्न पे तुम क्या लिख रहे हो?
जो भी लिख रहे हो, मेरा दिल लिख रहे हो.
कैसे हाँ ढूँढू अब कोई रास्ता
मेरी हर राह पे तुम उनका घर लिख रहे हो.

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Bitcoin Beauty


सुन्दर-सुन्दर सी धरती पे
तू सुन्दर-सुन्दर सी है.
निकले जब तू बन-ठन के
बजती सबके दिल की है.

छोड़ दे तू चूल्हा -चौकी
और चिंता पैसों की.
मेरी नजर में रानी
तू तो मेरी बिटकॉइन सी है.

Rifle Singh Dhurandhar