ना अपहरण, ना बलात्कार कीजिये


जिंदगी जहाँ पे दर्द बन जाए
वहीँ से शिव का नाम लीजिये।
अगर कोई न हो संग, राह में तुम्हारे
तो कण-कण से फिर प्यार कीजिये।

राम को मिला था बनवास यहीं पे
तो आप भी कंदराओं में निवास कीजिये।
माना की अँधेरा छाया हुआ हैं
तो दीप से द्वार का श्रृंगार कीजिये।

जिंदगी नहीं है अधूरी कभी भी
तो ना अपहरण, ना बलात्कार कीजिये।
माना की किस्मत में अमृत-तारा नहीं
तो फिर शिव सा ही विषपान कीजिये।

Rifle Singh Dhurandhar

जय सियाराम


प्रेम है तो प्रेम से -३
हाँ बोलिये
जय सियाराम, जय -जय सियाराम
जय सियाराम, जय -जय सियाराम।

मन को जो बाँध ले, तन को बिसार के
ऐसी छवि कहाँ देखि चारों धाम?
जय सियाराम, जय -जय सियाराम
जय सियाराम, जय -जय सियाराम।

मायापति जो-२, स्वयं संसार के
पिता के प्रेम में भटके गली-गली, गावं।
जय सियाराम, जय -जय सियाराम
जय सियाराम, जय -जय सियाराम।

जीवन भर रखा एक पत्नी -व्रत
इससे बड़ी औरत की और क्या चाह?
जय सियाराम, जय -जय सियाराम
जय सियाराम, जय -जय सियाराम।

जिसके ह्रदय में, कैकई -कौशल्या,
लक्ष्मण -विभीषण, हैं सब एक सामान।
जय सियाराम, जय -जय सियाराम
जय सियाराम, जय -जय सियाराम।

अपने माता-पिता को मत ताड़िये
वरना छलकेंगें आंसू आँखों से हर एक रात.
जय सियाराम, जय -जय सियाराम
जय सियाराम, जय -जय सियाराम।

एक ही जीवन है सबका
प्रेम में ना तोड़िये कभी विश्वास।
जय सियाराम, जय -जय सियाराम
जय सियाराम, जय -जय सियाराम।

संघर्ष से ही बदलता है मानव-जीवन में
हर अंत और परिणाम।
जय सियाराम, जय -जय सियाराम
जय सियाराम, जय -जय सियाराम।

Dedicated to the #RamJanam #BhoomiPujan for #RamMandir in #Ayodhya.

परमीत सिंह धुरंधर

नारी और श्री हरी


जब – जब नारी पात्र बनी है, हंसी, भोग, बिलास का
श्री हरी अवतरित हुए हैं लेकर नाम कृष्णा – राम का.

पूरी महाभारत रच दिया था, रखने को एक नारी की लाज
कैसे तुम नाम दोगे उसे नारी के अभिशाप का?

ज्ञान पे तुम्हारे लग रहा, अब अभिमान है छा रहा
वाणी ऐसी ही होती है, जिसके मन – मस्तक में हो पाप छिपा।

अभिमानी को कब हुआ है श्री हरी का आभास भी
ऐसे ही जन्म होते हैं कुल-काल-कोख पे दाग सा.

परमीत सिंह धुरंधर 

मेरे श्रीराम प्रभु


मैं बुलंद हूँ, और बुलंदी मेरी आपके नाम से मेरे प्रभु
मैं भक्त हूँ, और मेरी भक्ति आपके चरणों से मेरे प्रभु।
स्वयं शिव भी लगावे ध्यान जिसका
रुद्रावतार लेकर करे बखान जिसका
टूट जाए माया की हर जंजीर, एक तेरे नाम पे प्रभु
भवसागर में सहारा बस एक तेरा ही, मेरे श्रीराम प्रभु।

Dedicate to the Shri Ram Mandir construction.

परमीत सिंह धुरंधर 

श्री हरी


थकते नहीं निहारते
रह -रह कर पुचकारते
अघाते नहीं थाम के.
चक्रवर्ती सम्राट
चूमते शिशु-पाँव
भूलकर ताज
और महल चमचमाते।
माँ देख रही
प्रजा हंस रही
एक बालक के कहने पे
सम्राट मटक-मटक नाचते.

परमीत सिंह धुरंधर 

कण – कण में व्याप्त है श्रीराम


कण – कण में व्याप्त है श्रीराम
चाहे अयोध्या हो या अंडमान।

मंदिर बने या ना बने
जयकारों में गूँजते रहेंगे श्रीराम।

भूमण्डल के हर कोने – कोने मे
जन – जन के ह्रदय में है श्रीराम।

परमीत सिंह धुरंधर

जन – जन के ह्रदय में हैं श्रीराम


जब श्रीराम को आना होगा
श्रीराम आयेंगे।
अत्याचारी से कह दो
संग हनुमान जी भी आयेंगे।
जब मंदिर बनना होगा
मंदिर बन जाएगा।
जन – जन के ह्रदय में हैं श्रीराम
ह्रदय से कैसे मिटाओगे?

इस माटी का रंग उनसे
इस माटी की खुशबु हैं श्रीराम।
मीठी हो जाती है धुप भी
अगर लिख दें
हम आँगन में श्रीराम।
घर – घर में बसे हैं
हनुमान-ध्वज में श्रीराम
घर – घर से कैसे मिटाओगे?

परमीत सिंह धुरंधर

क्यों Fair & Lovley ढूंढती हैं?


नदिया हमसे
ये सवाल पूछती है.
किसके पाँव पखारूँ?
वो नाम पूछती है.

पत्थर बन गया
एक सुन्दर सी नारी
फिर क्यों भारत की लड़कियाँ
Fair & Lovley ढूंढती हैं?

यहाँ पत्थर पे भी
तुलसी चढ़ती है.
फिर क्यों भारत की लड़कियाँ
Fair & Lovley ढूंढती हैं?

परमीत सिंह धुरंधर

मिट्टी में लोटना


राम जी ने भी लक्ष्मण से कहा था, “मिट्टी में लोटना ज्यादा आनंददायक और मीठा है, वनिस्पत रण में दुश्मन को बांधना।”

परमीत सिंह धुरंधर

मेघनाथ तैयार है


तेरे अंग – अंग पे अधिकार करने को
मन व्याकुल है रानी तुझे प्यार करने को.
अपने पिता से कह दो की स्वीकार कर ले हमें
वरना मेघनाथ तैयार है युद्ध आरम्भ करने को.

माना की विष्णु के सखा हैं वो
माना की अजर और अमर हैं वो.
मगर दम्भ मेरा भी उछाल मार रहा
उनको आज यहाँ परास्त करने को.

सोख लूंगा समस्त क्षीरसागर को
अपने तीरों से बांधकर शेषनाग को.
अपने पिता से कह दो की स्वीकार कर ले हमें
वरना मेघनाथ तैयार है त्राहिमाम करने को.

परमीत सिंह धुरंधर