माँ मुझे विरक्ति दे


शक्ति दे
भक्ति दे
दे माँ
मुझे विरक्ति दे
काम से
क्रोध से
विश्राम से.

ज्ञान दे
अनसंधान दे
दे माँ
मुझे प्रमाण दे
श्रिष्टि का
समृद्धि का
कृति का.

अनुगृहीत कर दे
विकसित कर दे
कर माँ
मुझे तृप्त कर दे
अपनी माया से
अनुराग से
अपने प्रसाद से.

 

परमीत सिंह धुरंधर

बोलो जगदम्बे जय माँ अम्बे, दुःख हर ले मैया.


बोलो जगदम्बे जय माँ अम्बे, दुःख हर ले मैया.

आसुंवो की धरा, मन की ये  पीड़ा, सब हर ले मैया.
बोलो जगदम्बे जय माँ अम्बे, दुःख हर ले मैया.

कोई नहीं एसा हाँ तेरे जैसा, बिगड़ी बनाये सबकी.
भटके हुए हैं तेरे लाडले, इनको संभाल मैया.
बोलो जगदम्बे जय माँ अम्बे, दुःख हर ले मैया.
मन के आकर को, तन के विकार को, यैसे हर ले तू,
 सब हाँ सामान हों, कोई ना असमान हों, दर पे तेरे मैया.
परमित बोलो जगदम्बे जय माँ अम्बे, दुःख हर ले मैया.