मैं


मुझे डुबाने के लिए ज़माने ने जब भी मशक्कत की
मैं उसकी लहरों पे और उभरा हूँ.

परमीत सिंह धुरंधर 

अब अश्कों में बहाया जाएगा


रंगे-हालात बदलते -बदलते, कुछ यूँ बदल गयी जिंदगी
जिन्हे छुपाते थे किताबों में, उन्हें अब अश्कों में बहाया जाएगा।
हमसे मत पूछो, खंजर था या गोली थी
अब तो इस मौत के बाद भी उसे नहीं भुलाया जाएगा।

परमीत सिंह धुरंधर 


इश्क़ में लड़कियाँ नहीं रोती
जो गुजर गयी जिंदगी, वो लौट के नहीं आती.

Girls don’t cry in love
The life that has passed does not come back.

परमीत सिंह धुरंधर