मिट्टी में लोटना


राम जी ने भी लक्ष्मण से कहा था, “मिट्टी में लोटना ज्यादा आनंददायक और मीठा है, वनिस्पत रण में दुश्मन को बांधना।”

परमीत सिंह धुरंधर

तारीफों का शब्द


क्या किस्मत पाई है तुमने भी Crassa?
तुम सा शहर में कोई दूसरा नहीं मिलता।

कितना भी काम आ जाए हम किसी के
अब वो तारीफों का शब्द नहीं मिलता।

परमीत सिंह धुरंधर

पर तेरा नाम लेते हैं


तेरी आँखों की कसम खाते हैं
तन्हाई में जी रहे पर तेरा नाम लेते हैं.

तुम मिलो कभी तो तुम्हे बता दें
वो शरारत थी बस तुम्हारे लिए.

सैकड़ों मिटे तो उनकी हैसियत बनी
ये शहर उनका हुआ, हमारी गरीबी रही.

परमीत सिंह धुरंधर