संग Crassa के रहने वो लगीं…..


रौशनी इस कदर, वो आँखों की बनी,
अँधेरा अब कहाँ, इस जिन्दगी में है.
पास आके बाहों में, वो सिमटने हैं लगीं,
तमन्ना अब कहाँ, कोई इस जिन्दगी में है.
उन्हें भोला मैं कहूँ, या तकदीर अपनी,
चाँद होके आसमाँ का, संग परमीत के रहने वो लगीं….Crassa

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