किसी ने मेरी पंक्तियों को आज सराहा,
तो ये लगा , जिन्दगी सही राहों पे तो है.
कांटे ही सही, चुभते हुए मेरे पांवों में,
ये मेरे खून के बहते कतरे, किसी की निगाहों में तो हैं, परमित…..Crassa
किसी ने मेरी पंक्तियों को आज सराहा,
तो ये लगा , जिन्दगी सही राहों पे तो है.
कांटे ही सही, चुभते हुए मेरे पांवों में,
ये मेरे खून के बहते कतरे, किसी की निगाहों में तो हैं, परमित…..Crassa
hamesa rahege kisi ki neegaho mei……………….
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