बाजार में बेचने जाता हूँ,
बिकता नहीं,
आग में जलाता हूँ,
जलता नहीं,
अँधेरे में कही छोड़ आता हूँ,
पर साथ छूटता नहीं,
मंदिर, मस्जिद, कोई भी दर,
पे सजदा , भी अब किसी काम,
आता नहीं,
इंसान हूँ, पर
इंसानों की हर बस्ती,
में जाकर देखा,
किसी के पास ये अमूल्य ,
रत्न नहीं,
पर कोई भी इसे , मुझसे
छीनता नहीं,
चुराता नहीं……..Crassa