बदलता मौसम भी शर्मसार है, वो इस कदर रंग बदलती है,
चाँद भी कहीं जाके छुप जाता है , वो इस कदर साथ बदलती है.
पोंगे पंडित थे वो जो लिख गये, की मनेका ने विश्वामित्र का तप तोडा,
बिलखते-बिकलते शिशु को जिसने , सवर्णों की चाहत में छोड़ा,
नागिन भी विषहीन हो जाये, ये इस कदर जहर घोलती हैं,
की भारतीय नारी हैं ये, जो हर पल में अपना चरित्र बदलती है, परमित …..Crassa
Month: March 2013
एक लड़की का भोला दिल
एक लड़की का भोला दिल,
बोला,
एक शाम को,
खेलोगे क्या मेरे साथ,
छत्री फूटबाल,
एक शाम को.
शातिर है , शैतान है छत्री ,
आँखों में एक चमक आ गयी,
बोला,
खेलूँगा, मगर
सिर्फ मैं रात को.
विनती हुई, गुहार हुई,
छत्री के चरणों में गिरी,
एक हसीना ने प्रेम-गुहार की.
मुकाबला हुआ,
एक भोली लड़की का एक शैतान से,
शुभारम्भ हुआ , हंग्कोक पे ,
मीठे-मीठे दो जाम से.
पसीने-पसीने हो गयी ,
एक सीधी सी लड़की,
निष्ठुर है, चालक है छत्री ,
खूब छकाया, उसे
एक रात को……Crassa
महाराणा प्रताप और हल्दीघाटी.
आज की रात,
जरा सज के मिल,
ना जाने,
कल हल्दीघाटी में,
क्या होगा.
दिल में तुम्ही,
रहोगी प्रिये,
मगर, न जाने,
कल, महाराणा का,
तन कहाँ होगा.
बिखरा दे अपनी जुल्फों को,
मेरे इस जख्मों से सने तन पे,
न जाने, खडग का वार
अब कहाँ होगा.
आ जरा, पास
तेरे सीने पे, सर
रख के सो लूँ,
जाने फिर कहाँ,
अब विश्राम होगा.
यूँ न कुम्हला मेरी क्षत्राणी ,
इस जिन्दगी की चाहत में,
जब तक महाराणा के हाथों में ,
खडग है, जोधा के हलक,
में भी अटका उसका प्राण होगा.
मैं उठा हूँ,
अपने मेवाड़ के लिए,
जो आबरू है मेरी,
वो बढ़ा है ,
अपने विस्तार के लिए,
जो आरजू है उसकी,
इन मधुर ओठों से पिला कर,
विदा कर मुझे,की
जाने इस बार , कैसा
भीषण स्नाग्राम होगा, परमित…….Crassa
एक लड़की १६ साल की Crassa की दीवानी हुई……….
एक लड़की, १६ साल की इतनी निखरी हुई,
चढ़ती जवानी से, जिसकी चाल बिगड़ी हुई,
जब से देखा है उसने Crassa की तस्वीर ,
आरमान उसके दिल की, अब जगी जगी हुई,
की लगा के आँखों में वो काजल, वो Crassa के सपने सजाती हुई,
कानों के बजते है जब झुमके, तो Crassa की गीत गाती हुई,
एल लड़की १६ साल की, इतनी पतली सी,
चढ़ती जवानी से, जिसकी चाल बिगड़ी हुई,
पाने को Crassa को, हर सोमवार शिव-मंदिर जाती हुई,
एक लड़की १६ साल की, Crassa की दीवानी हुई,
सब्जी बनाने की हल्दी, तन से लगाती हुई……Crassa