शादी होगी Crassa की,
दुल्हन बनेंगी मेरी भाभी,
नाचेंगे Crassa भैया,
और,
शहनाई बजायेंगी मेरी भाभी.
कितनी रात तरपे हैं,
और,
कितने दिन हैं जागें,
भटके -भटके , जंगल-जंगल,
काम-क्रोध सब साधे.
टूटेगा अब बांध सब्र का,
मीठे बेर खायेंगे,
और,
चुन-चुन, खिलाएँगी,
बनके सबरी, मेरी भाभी….Crassa