किस्मते-बेवफाई


रात गुजरने वाली हैं,
जाम मेरा अब भी खाली हैं.
इतना बता तू ए साकी,
ये मेरी किस्मत या तेरी बेवफाई है.
एसा भी मुझमे हैं क्या,
जो भेद तू जान गयी.
सबके पहलु में तेरा दामन,
बस मुझसे ही ये तेरी दुरी हैं.
झूम रहें हैं जो तेरी मस्त आदवों पें,
दो पल के मेहमान हैं तेरी अंगराई के.
सारी उम्र तेरे दर पें मैंने गुजार दी ,
फिर भी मेरी सिर्फ तन्हाई हैं.
इतना बता तू ए साकी,
ये परमित की किस्मत या तेरी बेवफाई है….Crassa

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