रौनके-आस्मां


टूटे हुए तारे से न पूछ रौनके-आस्मां,
उसके दामन में इतने सितारें,
एक मैं टूट भी गया तो उसका क्या.
मुरझाये कलि से न पूछ दास्ताने-गुलिस्ताँ,
उसके पहलु में इतने फूल,
एक मै मुरझा भी गया तो उसका क्या.
आशिक की मौत पे ना पूछ हाले-जिगर महबूबा का,
उसके आँचल में इतने हैं बैठे ,
एक मै मिट गया भी तो उसका क्या.
पूछना ही है अगर तुझे परमित, तो
उस माँ के दिल से पूछ, जिसके बेटे को आशिक बना के ,

किसी ने हलाले-मोहब्बत कर दिया….

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