एक राजा की दो रानी,
एक गोरी ,
एक काली-कानी.
एक दिन शिकार में,
राजा हार गये,
शेर के प्रहार से.
कैसे तो जान बची,
पर बिछुड़ गये राजा,
आपने रानी के श्रींगार से.
घोड़े दोड़े ,
मंत्री भागे,
पूरब से पंछिम तक,
कोना-कोना छान मारा,
उत्तर से दक्खिन तक.
राज-पाट सँभालने को,
मंत्री बन गये राजा,
और, रानियाँ भूल गयी,
राजा को मंत्री के प्यार से.
भूलते-भटकते, एक दिन राजा
जा पहुंचे अपने दरबार में,
दुर्बल-मलिन तन को,
पहचान न सकी गोरी रानी,
कानी रानी ने स्वागत किया, परमित
राजा का प्रेम के मल्हार से.