आरजुए — मोहब्बत कभी इंतकाम नहीं लेती,
ये तो हुस्न है उनका,जो इश्क को इलज़ाम देतीं.
वो जब मेरे पास थीं, चूम कर रखता था मैं,
फिर रहीं है अब गैरों की महफ़िल में, ठोकरों पे सालामी देतीं.
हिम्मते-मर्द की कभी शाम नहीं होती,
ये तो उनकी बेवफाई है जो उगते सूरज को दीदार देतीं, परमित…Crassa