रात गुजरने वाली हैं,
जाम मेरा अब भी खाली हैं.
इतना बता तू ए साकी,
ये मेरी किस्मत या तेरी बेवफाई है.
एसा भी मुझमे हैं क्या,
जो भेद तू जान गयी.
सबके पहलु में तेरा दामन,
बस मुझसे ही ये तेरी दुरी हैं.
झूम रहें हैं जो तेरी मस्त आदवों पें,
दो पल के मेहमान हैं तेरी अंगराई के.
सारी उम्र तेरे दर पें मैंने गुजार दी ,
फिर भी मेरी सिर्फ तन्हाई हैं.
इतना बता तू ए साकी,
ये परमित की किस्मत या तेरी बेवफाई है….Crassa
Month: April 2013
चाहत
तेरा चेहरा आज भी हजारो में हैं ,
इस ढलती उम्र में भी वो मेरा दर्द हैं.
एक झलक से तेरे सुकून मिल रहा ,
नाउमिदों को उमिंद मिल रहा.
ना छुपा इस हुस्न को,
चिलमन में मेरे महबूब.
आज भी परमित का दिल,
तेरी पनाह मांग रहा…..Crassa
जलती हूँ मैं…..
हर रात जलती हूँ मैं,
जिसकी आगोश में,
उसी को नहीं पता कि,
कितना जली हूँ मैं इस प्यास में.
बुझ जाती है हर रात जवान हो के,
एक ही सांस में,
रह जाती हूँ मैं बस,
अकेली तन्हा बंधी इस प्यास में.
बरसती हूँ बनके,
काली घटा हर रोज,
मेरी बूंदों को मगर,
बस मिली है ये बंजर जमीन.
बरसों से सजती आ रही हूँ,
जिस आईने के सामने,
वो भी कहने लगा है कि,
मुझमे ही कोई हैं कमीं.
इठलाती-बलखाती,
नदियाँ थी कभी मैं,
आज बस मंथर,स्थूल,
एक प्रवाह रह गई हूँ मै, परमित……Crassa
Crassa का इम्तहाने-इश्क
उनकी आधी तस्वीर ही देख कर,
दिल ने उनको अपना कह दिया,
कितनी धड़कने उठी ह्रदय में,
आँखों ने सुनहरा सपना देख लिया.
वो खुबसूरत हैं या नहीं,
अब ये कोई मायने नहीं रखता,
मैंने तो उन्हें , कब का
अपनी जिन्दगी मान लिया.
वो मिली, मगर मैं कह,
भी न सका हाले-दिल,
अपनी खामोश मोहब्बत को,
परमित ने इम्तहाने-इश्क समझ लिया…….Crassa
ये बता प्रिये……
मैं रक्त की हर बूंद से तेरी तस्वीर बनाके ,
रखूं तो किस दिवार पे , ये बता प्रिये.
मै सड़कों पे रात बिताने वाला,
मिटटी में , अम्बर के तले सोने वाला,
तेरी अश्कों को, अपने पलकों से उठा कर,
मै संभालूं तो कहाँ , ये बता प्रिये..Crasaa
मेरे यार की शादी है…
शादी होगी Crassa की,
दुल्हन बनेंगी मेरी भाभी,
नाचेंगे Crassa भैया,
और,
शहनाई बजायेंगी मेरी भाभी.
कितनी रात तरपे हैं,
और,
कितने दिन हैं जागें,
भटके -भटके , जंगल-जंगल,
काम-क्रोध सब साधे.
टूटेगा अब बांध सब्र का,
मीठे बेर खायेंगे,
और,
चुन-चुन, खिलाएँगी,
बनके सबरी, मेरी भाभी….Crassa
मैं बुलंद हूँ, बुलंदियों का नाम हूँ…..
बहुत दूर-दूर से उठती हैं लहरें ,
मेरे किनारों को तोड़ देने को,
मगर हम किनारें वहीँ हैं वहीँ,
कि लहरें मिट जाती है जहां आके,
कि बहुत जोर -जोर से उमरते है बादल,
मेरी सरहदों को डूबा देने को,
मगर ये सरहदे वहीँ हैं वहीँ,
मिट जातें है बादल जहां बरस के, परमित…Crassa