योवन के झूले


कहाँ से चली हो,
कहाँ तक चलोगी,
जरा बतला दो न.
खुली-खुली लट है,
चंचल चितवन है,
आँचल के बोझ को,
इसपे से अब हटा दो ना.
खिला खिला अंग है,
उभरता बदन है,
अपने योवन के झूले में,
मुझको भी झुला दो ना.

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