एक इल्तिज्ज़ा है दिल की,
मेरे पास आइये,
कुछ दुरी भी रहे ,
कुछ शर्म भी रहे,
मैं अपनी साँसों को न रोक सकूँ,
आप अपनी बोझल पलकों से न कह सकें।
एक इल्तिज्ज़ा है दिल की,
की अपन जुल्फों में बांध लीजिये,
मैं बादल बनके न अम्बर पे उड़ सकूँ,
आप तितली बनके न खो सकेन.
एक इल्तिज्ज़ा है दिल की,
दो बूंद अपने प्याले से छलका दीजिये,
मैं अपनी प्यास न मिटा सकूं, परमित
आप न फिर मुझे पिला सकें।