तुम इस कदर उतर गये हो दिल में,
अब क्या रखा है खोंने में.
तुम अगर मिल जावो हमें,
क्या रखा है फिर ज़माने में.
हर साँस की मेरी तुम ही चाहत,
हर रात की मेरी तुम ही हो आहट,
तुम खनका दो जो अपने पायल,
तो क्या रखा है मदिरालय में.
नयनों से अपने सींचती हो मेरे जख्मों को,
अब पास आ कर कह दो की मेरे जख्म हैं तुम्हारे,
तुम लहरा दो अप्पना आँचल,
तो, परमित, फिर सावन में क्या रखा है