घटनावों का घटित होना,
कल्पनावों का सृजित होना,
एक स्त्री का छल है,
दूजा परुषार्थ है.
सृजन है, श्रींगार है,
दोनों में निर्माण है,
मगर एक भाग्य के अधीन,
दूजा कर्म का आकार है,परमित.
घटनावों का घटित होना,
कल्पनावों का सृजित होना,
एक स्त्री का छल है,
दूजा परुषार्थ है.
सृजन है, श्रींगार है,
दोनों में निर्माण है,
मगर एक भाग्य के अधीन,
दूजा कर्म का आकार है,परमित.