वो छोड़ गयी जिस मोहब्बत को दोस्ती के नाम पे,
आज उसी को अपनी गलती बता रही है,
दोष तो हमेशा काजल का ही है, दोस्तों,
जिसे कल तक आँखों में बसाती थीं,
आज उसी को कालिख कह रहीं है, परमित.
वो छोड़ गयी जिस मोहब्बत को दोस्ती के नाम पे,
आज उसी को अपनी गलती बता रही है,
दोष तो हमेशा काजल का ही है, दोस्तों,
जिसे कल तक आँखों में बसाती थीं,
आज उसी को कालिख कह रहीं है, परमित.