पिता तेरी चरणों में, ये जीवन समर्पित है,
पास नहीं है तन के, पर मन में तू ही जीवित है.
थक के जब भी मैं रुका, दुःख के समंदर में भींग के,
नजरो को दूर तू ही नजर आता hai.
पास नहीं है तन के परमीत के,
पर रुधिर में तू ही प्रहावित है.
मन में तू ही जीवित है.
papa jaha bhi hoge unko aapne bete par proud karte hoge ……………..
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