नैतिकता-अनैतिकता


कि हम पागल हो गये जिनकी आँखों में झाँक के,
जाने कैसे लूट गये लोग, उनको बाहों में भर के.
कि आज तक नहीं भुला परमीत, जिस दरिया में डूब के,
जाने कैसे पार हो गये लोग, उन धरावों में तैर के.
कि मिटने लगे हैं हम जिस नैतिकता का पाठ पढ़ कर,
जाने कैसे जी रहें हैं लोग, अनैतिकता से बांध के.

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