रसिया


आज हमने जमाने को रसिया, आँचल के तले अपने सो लेने दिया,
चैन मिला उनको,
चैन मिला उनको, लूटने पे मेरे,
तो दिल खोल के फिर,
तो दिल खोल के फिर, हमने खुद को लूटने दिया।
आज हमने जमाने को रसिया, योवन के रस से सींच दिया,
फूल खिले उनके,
फूल खिले उनके, उजडने पे मेरे,
तो दिल खोल के फिर,
तो दिल खोल के फिर, हमने खुद को उजडने दिया।
आज हमने जमाने को रसिया, आँखों में अपने काजल बन्ने दिया,
सपने सजे उनके,
सपने सजे उनके, टूटने पे मेरे,
तो दिल खोल के फिर,
तो दिल खोल के फिर, हमने खुद को टूटने दिया।
आज हमने जमाने को रसिया, पावों में अपने मेहँदी लगाने दिया,
आँगन चमका उनका,
आँगन चमका उनका, बिखरने पे मेरे,
तो दिल खोल के फिर,
तो दिल खोल के फिर, हमने खुद को परमीत बिखरने दिया।

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