कि बड़ी भीड़ लगी है सैया मेरे मैके में,
सब पूछ रहे हैं तेरे घर आने पे.
अब जब निकलती हूँ इन गलियों से,
सब बुलाते हैं बैठने, घर-आँगन में.
कि बड़ी रौनक बढ़ी है सैया मेरे मैके में,
सब पूछ रहे हैं तेरे घर आने पे.
पहले भी जलती थी सब्जी चूल्हे पे,
मगर कोई कुछ कहता न था,
अभी तो खाँसी उठी नहीं,
बहने-भाभी, बैठा देतीं हैं हमें झूले पे.
कि बड़े भाव चढ़ें है सैया मेरे मैके में,
सब पूछ रहे हैं परमीत तेरे घर आने पे.
superb ……………..
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