आइना कह रहा है,
न इतना निखरो तुम,
कि कही बिजली गिरेगी,
कहीं बादल बरसेंगे।
योवन का नशा,
प्रियतम से है,
कभी गजरा टूटेगा,
कभी पायल छनकेगी।
कलियाँ कहती है,
न इतना टहलो तुम,
कहीं काँटा चुभेगा,
कहीं आँचल उड़ेगा।
योवन का नशा,
प्रियतम से है,
कभी काजल बहेगा, परमीत
तो, कभी जुल्फे बाँध लेगी।