बोलो जगदम्बे जय माँ अम्बे, दुःख हर ले मैया.
आसुंवो की धरा, मन की ये पीड़ा, सब हर ले मैया.
बोलो जगदम्बे जय माँ अम्बे, दुःख हर ले मैया.
कोई नहीं एसा हाँ तेरे जैसा, बिगड़ी बनाये सबकी.
भटके हुए हैं तेरे लाडले, इनको संभाल मैया.
बोलो जगदम्बे जय माँ अम्बे, दुःख हर ले मैया.
मन के आकर को, तन के विकार को, यैसे हर ले तू,
सब हाँ सामान हों, कोई ना असमान हों, दर पे तेरे मैया.
परमित बोलो जगदम्बे जय माँ अम्बे, दुःख हर ले मैया.
jai mata di..
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