दूध


महान-महान लोगों ने अपनी कलम से माता-पिता के सन्दर्भ में लिखा है. मैं सिर्फ इतना ही कह सकता हूँ कि जब मैं किसी को रगड़ देता हूँ तो मुझे मेरी माँ कि याद आती है, और जब मैं किसी को रगड़ने के लिए तैयार होता होता हूँ तो पापा कि याद आती है. जैसे भगवान् हनुमान जी ने कहा हैं कि भगवान् श्री राम के नाम कि महता स्वयं भगवान् श्री राम से भी ज्यादा है. ठीक उसी तरह माँ के दूध कि महता माँ से भी ज्यादा है. अंत में एक कविता जो बचपन में पापा सुनाते थे:
सोलह भैंस के चौंसठ चभाका,
सवा सेर घी खाईं रे,
कहाँ बारन तहार बाघ मामा,
एक ताकड़ लड़ जाईं रे.
नए खून का नया हूँ मैं बांका,
नई मेरी अंगराई रे,
कहाँ बारन तहार, बाघ मामा,
एक ताकड़ लड़ जाईं रे, परमीत.

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