अंदाज बदल-बदल के रखते है,
वो आँचल को अपने सीने पे,
कहीं गुमराह न हो जाए कोई,
देख के रंग उनके योवन के.
निकलते है बदल-बदल के,
वो राहें अपने घर से,
कहीं बवाल न हो जाए, देख के
उनका मुखड़ा इस शहर में, परमीत
अंदाज बदल-बदल के रखते है,
वो आँचल को अपने सीने पे,
कहीं गुमराह न हो जाए कोई,
देख के रंग उनके योवन के.
निकलते है बदल-बदल के,
वो राहें अपने घर से,
कहीं बवाल न हो जाए, देख के
उनका मुखड़ा इस शहर में, परमीत