वो रंग नहीं आसमान पे,
जो मुझको फीका कर दे.
वो फूल नहीं इस गुलशन में,
जो मुझको दीवाना कर दे.
बदला है हमने,
हवावों के रुख को,
कई बार इस समंदर में.
वो धार नहीं इन लहरो में,
जो किनारों को मेरे,
डूबा दे, परमीत.
वो रंग नहीं आसमान पे,
जो मुझको फीका कर दे.
वो फूल नहीं इस गुलशन में,
जो मुझको दीवाना कर दे.
बदला है हमने,
हवावों के रुख को,
कई बार इस समंदर में.
वो धार नहीं इन लहरो में,
जो किनारों को मेरे,
डूबा दे, परमीत.