रिश्ते दरक,
गएँ हैं,
इस कदर,
कि बहने लगे हैं,
यादें अब,
मवाद बनकर।
सुखी डालों पे,
अब भी,
लगे है,
हरे पत्तें,
जो,
बिलख रहे हैं,
जावानी में ही,
अपनी जड़ों,
से बिछुड़कर, परमीत।
रिश्ते दरक,
गएँ हैं,
इस कदर,
कि बहने लगे हैं,
यादें अब,
मवाद बनकर।
सुखी डालों पे,
अब भी,
लगे है,
हरे पत्तें,
जो,
बिलख रहे हैं,
जावानी में ही,
अपनी जड़ों,
से बिछुड़कर, परमीत।