न देखिये,
मुझे प्यार से,
कि हया अभी,
इन आँखों में है.
तन तो आ गया,
बन के दुल्हन,
मन अभी भी,
उस आँगन में है.
न छेड़िये,
मेरे दिल को,
कि उसमे,
अब भी, परमीत
बाबुल ही है.
न देखिये,
मुझे प्यार से,
कि हया अभी,
इन आँखों में है.
तन तो आ गया,
बन के दुल्हन,
मन अभी भी,
उस आँगन में है.
न छेड़िये,
मेरे दिल को,
कि उसमे,
अब भी, परमीत
बाबुल ही है.