ढल जाने दीजिये,
ढल जाने दीजिये,
आँचल को मेरे,
ढल जाने दीजिये।
कब तक मैं सम्भालूँ,
ये शर्मो-हया,
आज, अभी, इसे,
यहाँ टूट जाने दीजिये।
सीने में दबा के,
आँचल में छुपा के,
रखा है बरसों से,
जिसे राहों में बचा के,
आज, अभी, उसे,
यहाँ लूट जाने दीजिये।
ढल जाने दीजिये,
ढल जाने दीजिये,
आँचल को मेरे,
ढल जाने दीजिये।
कब तक मैं ही रहूँ,
बंध के रिवाजों से,
अरमानों को अपने,
यूँ दफना के,
जल रही है दिया,
जो कई रातों से,
आज, अभी, उसे,
यहाँ बुझ जाने दीजिये।
ढल जाने दीजिये,
ढल जाने दीजिये,
आँचल को मेरे,
ढल जाने दीजिये, परमीत।