सरहद पे हैं शातिर खड़े,
हम कब तक तुम्हे प्यार करें,
लूट जाएंगी ये सल्तनत मेरी,
अगर हम,
यूँ ही तेरी बाहों में रहे.
धीर बन के कर इंतज़ार मेरा,
फिर रंगूगा तुझे नए रंग से,
वैसे कमी नहीं संसार को मेरी,
तू चाहे तो, परमीत
खेल ले होली किसी और के संग में.