दरिया इतना उछलती है क्यों,
जरा हमको बता बलमा।
सागर इतना है गहरा हाँ क्यों ,
जरा हमको समझा बलमा।
कौआ आसमान में उड़ता है क्यों,
क्यों, फूलो पे मंडराएं भौरां।
कालिया खिलती हैं सुबह में क्यों,
जरा हमको बता बलमा।
सूरज बिखरायें किरणों को क्यों,
जरा हमको समझा बलमा।
बहती हवा का मुझे छू जाना,
क्यों, भाता है जुल्फों का लहराना,
गिराती हूँ मैं यूँ आँचल को क्यों,
जरा हमको बता बलमा।
परमीत, तू इतना है अनाडी हाँ क्यों,
जरा हमको समझा बलमा।